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EC का फ़ैसला: जीपीएस सिस्टम से होगी ईवीएम मशीनों की निगरानी

यह व्यवस्था लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ उपचुनावों में भी लागू होगी.

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों से इतर अन्यत्र स्थानों पर ईवीएम मशीनें ले जाने की घटनाओं से सबक लेते हुये आगामी लोकसभा चुनाव में वीवीपीएटी युक्त ईवीएम की आवाजाही पर जीपीएस की सतत निगरानी सुनिश्चित कर दी है.

आयोग द्वारा आम चुनाव के लिये लागू की गयी व्यवस्था के तहत ईवीएम को लाने ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस लगाने का फैसला किया गया है. इससे मशीनों की आवाजाही पूरी तरह से जीपीएस की निगरानी में हो सकेगी.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों को निर्वाचन पदाधिकारियों द्वारा मतदान केन्द्र से होटल या अन्य स्थानों पर ले जाये जाने की शिकायतें मिलने के बाद आयोग ने यह व्यवस्था की है.

इसके मद्देनजर आयोग ने, सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (सीईओ) को चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों को मतदान केन्द्र तक और मतदान केन्द्र से कंट्रोल रूम तक पहुंचाने के लिये जीपीएस युक्त वाहनों का उपयोग करने का निर्देश दिया है.

यह व्यवस्था लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ उपचुनावों में भी लागू होगी. आयोग ने सीईओ से ईवीएम की आवाजाही पर सख्त और सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है. जीपीएस की मदद से ईवीएम को निर्धारित समय सीमा के भीतर गंतव्य तक पहुंचाने पर भी नजर रखी जायेगी.

उल्लेखनीय है कि आयोग ने आगामी 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरण में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिये देश भर में लगभग 10.35 मतदान केन्द्र बनाये हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में यह संख्या 9.28 लाख थी.

मतदान में लगभग 39.6 लाख ईवीएम और 17.4 लाख वीवीपीएटी मशीनों का इस्तेमाल होगा. इनमें रिजर्व श्रेणी की वे मशीनें भी शामिल हैं जिन्हें मशीनों में तकनीकी के खराबी आने की स्थिति में इस्तेमाल के लिये सुरक्षित रखा जाता है.

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