कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्ट: “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नहीं, ये है प्रधानमंत्री फंसाओ योजना”: भाजपा को सबक सिखाने के मूड में राजकोट के किसान

 किसानों का कहना है कि मीडिया कभी भी किसानों की असल तस्वीर नहीं पेश करता है.

गुजरात के राजकोट में रहने वाले किसान दिलीप सैपारिया ने राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद को पत्र लिखकर आत्महत्या करने की अनुमति मांगी है. उनकी शिकायत है कि सूखे से फ़सल क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी अभी तक उन्हें फसल बीमा की राशि नहीं दी गई है. राष्ट्रपति के पास आत्महत्या की अनुमति देने की गुहार लगाने वाले सैपारिया अकेले किसान नहीं हैं. इनकी तरह 35 अन्य किसानों ने भी राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के 15 लाख किसान फसल बीमा के बकाया पैसा नहीं मिलने से नाराज हैं.

सैपरिया का कहना है, “हमलोग भीख नहीं मांग रहे हैं. यह हमारा अधिकार है. बड़े उद्योगपतियों और सरकार ने खेती को ध्वस्त करने के लिए हाथ मिला रखा है.

अक्टूबर 2018 में गुजरात सरकार ने राजकोट के दो तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठन भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष दिलीप सखिया का कहना है कि विचिया तहसील के किसानों को अभी तक फसल बीमा के पैसे नहीं मिले हैं. वही पडधारी तहसील के किसानों को छोटी राशि दी गई है, जो पर्याप्त नहीं है.

सखिया का कहना है कि राजकोट के गांवों में अंबानी की बीमा कंपनी रिलायंस द्वारा बीमा की जाती है, यानी यहां भाजपा सरकार और अनिल अंबानी जैसे उद्योगपतियों के बीच सांठगांठ चल रही है.

किसानों का आरोप है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सिर्फ अंबानी का फायदा हुआ है और सरकार ने किसानों का इस्तेमाल किया है. कुछ बीमा कंपनियों ने 2016 में राज्य से करीब 2360 करोड़ रुपए की प्रीमियम राशि वसूली थी, जबकि सिर्फ 954 करोड़ रुपए के क्लेम को ही पूरा किया गया. स्थानीय कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि यह योजना एक प्रकार का घोटाला है और किसान इसकी सच्चाई जान चुके हैं.

2017 के विधानसभा चुनाव में राजकोट ग्रामीण की सभी तीन विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि शहरी क्षेत्र की चारों सीट भाजपा के पास चली गई थी. सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र की 54 सीटों में कांग्रेस ने 30 पर जीत हासिल की थी.

भाजपा के वरिष्ठ नेता शम्भाजी भाई चौहान का कहना है, “यह सच है कि गुजरात के किसान हमारे प्रदेश और केंद्र की दोनों ही सरकारों से नाखुश हैं. लेकिन हम उनकी तकलीफ़ें दूर करने के सारे उपाय कर रहे हैं. हमारे स्थानीय नेता हर रोज गांवों में किसानों से मिल रहे हैं.

अब गुजरात कांग्रेस को उम्मीद है कि वो सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र की आठ सीटों में चार पर जीत हासिल करेगी.

खेर्दी गांव के निवासी चतुरभाई मोलिया का कहना है, “मीडिया बिकाऊ है. वे कभी भी किसानों की दयनीय स्थिति को नहीं दिखाते हैं. वे लोग मोदी की आलोचना करने वाली कोई ख़बर नहीं दिखाते हैं.”

ग्रामीणों का मानना है कि मीडिया प्रधानमंत्री मोदी के बयानों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाती है और असल तस्वीर दिखाने की कोशिश नहीं करती है. इसके बाद किसान बताते हैं कि बीते पांच साल में उनकी स्थिति बदतर हुई है.

एक अन्य किसान चंदू खंबारा का कहना है, “यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नहीं बल्कि प्रधानमंत्री फंसाओ योजना है. हमारा पैसा कहां है?” चंदू बताते हैं कि उन्होंने अपने 20 किलो कॉटन को 800 रुपए में बेचा है. यह उनके लागत का एक तिहाई से भी कम है.

कांग्रेस विधायक अमरशीभाई मेरजा का कहना है, “मुख्यमंत्री रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने 2012 में सौनी योजना को लागू किया था. लेकिन कभी भी उनकी मंशा नहीं थी कि इस योजना को पूरा किया जाए और पानी की समस्या से किसान निजात पा सके.”

सौनी योजना (सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण इरिगेशन) को नर्मदा नदी के पानी को सौराष्ट्र क्षेत्र के अन्य बांधों में पहुंचाने के लिए बनाया गया था.

लेकिन, इस क्षेत्र के किसान अभी भी इंतजार कर रहे हैं कि इस योजना को व्यवस्थित तरीके से क्रियाशील बनाया जाए. पिपलिया गांव के एक अन्य किसान हंसा पिपरिया का कहना है, “उन्होंने कई योजनाओं का उद्घाटन किया है. हमें इसकी जानकारी है, लेकिन हमें इस योजना से पानी भी नहीं मिलता है. कई बार हमें महीनों तक पानी नसीब नहीं होता.”

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है. मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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