कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मेक इन इंडिया पर्याप्त नौकरियां देने में रहा विफल, हम उत्पाद बनाने के बजाय आयात कर रहे हैं- लार्सन एंड टुब्रो के चेयमैन ए.एम नाइक

उन्होंने कहा, "विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार सृजन के साथ कुशल श्रम की आपूर्ति के बीच तालमेल में हम असफल रहे हैं. और यह बेमेल हमेशा बना रहेगा."

मोदी सरकार की महत्वकांक्षी मेक इन इंडिया योजना पूरी तरह असफल रहा है, अब बड़े कंपनी के अधिकारी भी गाहे बगाहे इसे स्वीकार कर रहे हैं. भारत की बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के चेयमैन ए.एम नाइक का कहना है कि सरकार की मेक इन इंडिया पहल पर्याप्त नौकरियां देने में विफल रही है क्योंकि अभी तक सभी क्षेत्रों की कंपनियां विनिर्माण के बजाय मालों का आयात कर रही हैं.

नाइक नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन(NSDC) के भी प्रमुख हैं, एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया, जिसके बारे में बहुत कुछ बोला गया, लेकिन उसे अभी बहुत कुछ करना है. हम सामानों के निर्यात के जगह नौकरियों का निर्यात कर रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कंपनियां के पास पूंजी के लिए विकल्प उपलब्ध नहीं है. हम आयात की सुविधा इसलिए देते हैं क्योंकि यह अवसर क्रेडिट सुविधा के साथ ही आता है.

नाइक ने सही कौशल और नौकरियों के बीच तालमेल की ओर भी इशारा किया है. उन्होंने कहा, “विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार सृजन के साथ कुशल श्रम की आपूर्ति के बीच तालमेल में हम असफल रहे हैं. और यह बेमेल हमेशा बना रहेगा.”

उन्होंने कहा कि, “एनएसडीसी के प्रमुख के रूप में मेरा ध्यान प्रशिक्षकों के गुणवत्ता सुधारने को लेकर है. हमें परिक्षण के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कर्मचारी और शिक्षक चाहिए.”

बता दें कि मेक इन इंडिया के साथ स्किल इंडिया का बुरा हाल है. पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक़ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वाले 33 फीसदी युवा रोज़गार हैं. साथ ही अब योजना के तहत दिया जाने वाला बजट भी सरकार द्वारा घटा दिया गया है.

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