कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

महाराष्ट्रः कर्ज़ के बोझ और सूखे की मार झेल रहे 947 किसानों ने 2018 में की आत्महत्या

बीड समेत औरंगाबाद और उस्मानाबाद में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है.

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले साल 947 किसानों ने आत्महत्या कीं. 1 जनवरी से 30 दिसंबर, 2018 के बीच बीड ज़िले में सबसे ज्यादा 197 किसानों ने आत्महत्या की है वहीं  औरंगाबाद 141 और उस्मानाबाद 140 किसान मौत को गले लगा चुके हैं.

मराठी दैनिक लोकसत्ता के अनुसार राज्य सरकार द्वारा किसानों के वित्तीय संकट को हल करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान न करना किसान आत्महत्या की बड़ी वजह है. मराठवाड़ा के किसान फसल उत्पादन में कमी और कर्ज़ के साथ लगातार सूखे की मार झेल रहे हैं.

किसान आत्महत्याओं के आंकड़ों के अनुसार, 603 पीड़ित परिवारों को सरकार की तरफ से मुआवज़ा मिला है, जबकि  लगभग 80 आत्महत्या के मामलों को अवैध घोषित किया गया है.

लगभग 243 मृत किसानों के मामलों में पोस्टमॉर्टम जांच जारी है. वहीं कुछ मामलों में, अधूरे दस्तावेजों की वजह से मृत किसानों के परिवार सरकार की तरफ से क्षतिपूर्ति सहायता प्राप्त करने में असमर्थ हैं.

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