कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

महाराष्ट्र: आदिवासी वन कानूनों की रक्षा के लिए धरना-प्रदर्शन आयोजित

मोदी सरकार ने इसी साल भारतीय वन अधिनियम, 1927 में पहले व्यापक संशोधन का मसौदा तैयार किया है, आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहा है.

केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 में परिवर्तन करने के फ़ैसले का आदिवासी संगठनों ने विरोध किया है. महाराष्ट्र के पालघर जिले में एसडीओ कार्यालय के बाहर सोमवार, 22 जुलाई को एआईकेएस, एआईएडब्ल्यूयू, एएआरएम जैसे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया.

आदिवासी संगठनों ने वन अधिकार कानून, 2006 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले लोगों के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन किया है.

इस विरोध प्रदर्शन को एडवर्ड वर्थ, विनोद निकोले, लहानी दौडा, रामदास सूतर और एआईकेएस, एआईएडब्ल्यूयू, एएआरएम के कई नेताओं ने संबोधित किया.

मंगलवार, 23 जुलाई को नासिक जिले में सीपीआई एम द्वारा विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है. इसे सीपीआई एम पोलित ब्यूरो के सदस्य बृंदा करात, एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवाले, एआईकेएस के पूर्व अध्यक्ष सात बार विधायक रह चुके जेपी गवित और अन्य नेता संबोधित करेंगे.

बता दें कि मोदी सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसी साल भारतीय वन अधिनियम, 1927 में पहले व्यापक संशोधन का मसौदा तैयार किया है, आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहा है.

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