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उच्च न्यायालय ने मणिपुर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के युगिन्द्रो को किया निलंबित

न्यायालय ने राज्य के पूर्व मुख्य सचिव जरनैल सिंह को प्रशासन का कार्यभार सौंपते हुए कुलपति के पद की ज़िम्मेदारी दी।

लगभग 5 महीनों से मणिपुर विश्वविद्यालय में छात्रों एवं शिक्षकों और प्रशासन के दरमियान तनाव के क्रम में गुरुवार को मणिपुर उच्च न्यायालय ने कार्यवाहक कुलपति (वीसी) के युगिन्द्रो सिंह और कार्यवाहक रजिस्ट्रार श्यामकेशो को निलंबित कर दिया है। मणिपुर यूनिवर्सिटी एक्ट 2005 के अधिनियमों के तहत उच्च न्यायालय ने राज्य के पूर्व मुख्य सचिव जरनैल सिंह को प्रशासन का कार्यभार सौंपते हुए कुलपति के पद की ज़िम्मेदारी दी है।

द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह एवं के. नोबिन सिंह की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सिंह की नियुक्ति निलंबित रहेगी। बता दें कि सितंबर महीने में युगिन्द्रो सिंह को तत्कालीन कुलपति एपी पांडेय ने नियुक्त किया था। एपी पांडेय को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा निलंबित किया गया था।

ग़ौरतलब है कि बीते 30 मई से 24 अगस्त तक यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं, लापरवाही और कुलपति पर विभिन्न आरोप लगाते हुए मणिपुर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (एमयूएसयू), मणिपुर विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (एमयूटीए) और मणिपुर विश्वविद्यालय स्टाफ़ एसोसिएशन (एमयूएसए) ने आंदोलन किया था। इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद कुलपति को अवकाश पर भेज दिया गया था। लेकिन सितंबर के पहले हफ़्ते में एपी पांडेय द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है जिसका छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ़ द्वारा कड़ा विरोध किया गया था।

एपी पांडेय पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों की जांच के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है। 18 सितंबर को राष्ट्रपति द्वारा इस जांच के पूरे हो जाने तक एपी पांडेय के निलंबन के आदेश दिए गए थे। मणिपुर विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है और विश्वविद्यालय के विज़िटर होने के नाते राष्ट्रपति ने एपी पांडेय को निलंबित किया था। उच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष से छात्रों के हित में यूनिवर्सिटी की स्थितियां सामान्य करने के लिए सुझाव मांगे थे। गुरुवार को जब अभियोजन पक्ष द्वारा कोई सुझाव नहीं दिया गया तब कोर्ट ने कहा कि “वह इसमें हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर है।”

न्यायालय ने जरनैल सिंह को कार्यवाहक रजिस्ट्रार चुनने और अपनी मदद के लिए नियुक्तियां करने के अधिकार दिए हैं। साथ ही वे यूनिवर्सिटी में स्थितियां सामान्य करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कोई भी आदेश दे सकते हैं या रद्द कर सकते हैं। गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी में 30 मई से अब तक कोई क्लास नहीं हुई है। ज्ञात हो कि 1 अक्टूबर को उच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़ी दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गयी थीं। न्यायालय ने कहा कि असामान्य परिस्थितियों के चलते उन्हें ऐसे मामलों में दख़ल देना पड़ता है।

राजभवन के एक अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ मणिपुर विश्विद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के युगिन्द्रो सिंह ने अपने अनुचित बयान के लिए राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से माफ़ी मांगी थी, जिसमें उन्होंने कहा था, “राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में हाल ही में हुए विवाद में प्रदर्शनकारियों को सरेआम समर्थन दिया था।” ग़ौरतलब है कि सिंह ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को तीन अक्टूबर को एक पत्र लिखकर दावा किया था कि उनके केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति का पद भार संभालने पर हेपतुल्ला ने सवाल उठाया और 21 सितंबर को एक बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया था।

इसके जवाब में राजभवन की ओर से भेजे गए एक पत्र में कहा गया था कि 3 अक्टूबर को योगीन्द्रो द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे गए पत्र में कही बातें मानहानिकारक है और उसमें प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का भी ख़्याल नहीं रखा गया। युगिन्द्रो द्वारा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में उन्होंने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय को “आतंकियों जैसे” आंदोलनकारियों के हाथों से बचाने के लिए वह तत्काल कदम उठाएं। छात्रों ने कार्यवाहक कुलपति की इस टिप्पणी का विरोध किया था। पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी कि बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई, जिस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

ज्ञात हो कि छात्र विश्वविद्यालय परिसर में उन 15 शिक्षकों और छात्रों की बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे जिन्हें सितंबर में गिरफ़्तार किया गया था। तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद सितंबर में इन शिक्षकों और छात्रों को गिरफ़्तार कर लिया गया था।

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