कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मणिपुर विश्वविद्यालय में डर और असुरक्षा का माहौल, छात्र-छात्राएं हॉस्टल छोड़ने को मजबूर

एक प्रोफेसर के शिकायत के बाद मणिपुर पुलिस कमांडो और सीआरपीएफ ने पुरुष छात्रावासों पर छापे मारे और कई छात्रों को गिरफ़्तार किया।

मोदी सरकार में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। छात्रों के बीच एक डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। हाल ही में जेएनयू में छात्रसंघ के दौरान हुई लड़ाई और उसके बाद कैंपस की किलेबंदी, इसका प्रमुख उद्दाहरण है।

मणिपुर विश्वविद्यालय में तो पिछले दिनों से आपातकाल की स्थिति बनी हुई है। डर और असुरक्षा के कारण 174 छात्र हॉस्टल छोड़ चुके हैं। बीबीसी के अनुसार कैंपस में हर जगह मणिपुर पुलिस कमांडो और भारतीय रिज़र्व बटालियन के सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। कैंपस को युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इन सब के पीछे की वजह प्रोफेसर जुगिंद्रो की शिकायत है। प्रोफेसर ने एक एफआईआर दर्ज करवाई थी कि जब वे विश्वविद्यालय के कुलपति का चार्ज लेने गए तो उन्हें क़ैद किया गया और दबाव में इस्तीफ़ा दिलवाया गया। शिकायत के बाद मणिपुर पुलिस कमांडो और सीआरपीएफ ने पुरुष छात्रावासों पर छापे मारे और कई छात्रों को गिरफ़्तार किया।

बीबीसी के अनुसार छापे की घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी सुरक्षाकर्मी पूर कैंपस में तैनात हैं। यहां तक कि महिला छात्रावास भी रात-दिन पर भी कड़ा पहरा बैठा दिया गया है।

एक छात्रा ने नाम प्रकाशित नहीं करने के शर्त पर बताया कि “हम बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि पुरुष पुलिसकर्मी दिन-रात छात्रावास के गेट पर खड़े हैं।”

एक अन्य छात्र ने कहा, “यह दुख की बात है कि हमारी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है और सुरक्षाकर्मी हमें शक़ की नज़रों से देखते हैं।”

दरअसल, 20 सितंबर को छात्रों को गिरफ़्तारी के संदर्भ में चर्चा करने के से मना कर दिया गया था।

दूसरी तरफ़ शिक्षक, सिविल सोसाइटी संगठन और कॉलेज के छात्रों ने गिरफ़्तार छात्रों और शिक्षकों को बिना शर्त रिहाई की मांग की है। विश्वविद्यालयों के एक प्रोफेसर का कहना है कि डीन, एचओडी और वरिष्ठ प्रोफेसरों को गिरफ़्तार किया गया है और इन सभी शिक्षकों ने पिछले30 सालों से कई छात्रों को पढ़ाया है और विश्वविद्यालय के विकास में इनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

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