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मनरेगा से लेकर सूचना का अधिकार तक कई शानदार उपलब्धियों के लिए जाना जाता है मनमोहन सिंह का कार्यकाल, पढ़ें अन्य उपलब्धियां

नरम दिखने वाले मनमोहन सिंह ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर कड़ा रूख अपनाया था।

मनमोहन सिंह को एक शालीन और मितभाषी नेता के तौर पर जाना जाता है। भारतीय राजनीति में उनकी गिनती सबसे साफ़ छवि के नेताओं में की जाती है। प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह के दस साल के कार्यकाल के दौरान देश ने ऐसी उपलब्धियां हासिल की, जो आज भी आम जनों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं। मनमोहन सिंह के जन्मदिन के अवसर पर हम उनकी कुछ ऐसी उपलब्धियां सामने रख रहे हैं जिन्होंने देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया।

आर्थिक उदारीकरण के जनक

नब्बे के दशक के शुरुआत में देश की अर्थव्यवस्था की हालत खराब थी। देश का राजकोषीय घाटा 8.5 के आसपास था। इसे कम करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। तब के प्रधानमंत्री पी.वी नरसिम्हा राव ने अनुभवी अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को राजनीति में उतारा और राज्यसभा का सदस्य बनाकर देश का वित्त मंत्री बनाया। वित्त मंत्री बनते ही मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार करना शुरू कर दिया। समाचार वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिक महज एक साल के भीतर उन्होंने राजकोषीय घाटे को कम करके 5.9 प्रतिशत के स्तर पर ला दिया। मनमोहन सिंह ने 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान उदारीकरण को लागू कर देश की अर्थव्यवस्था को नई राह दी। उन्होंने लाइसेंस राज का खात्मा किया, जिससे देश में विदेशी निवेश के मामले में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

शिक्षा का अधिकार कानून

मनमोहन सिंह की सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शिक्षा का अधिकार कानून भी शामिल है। समाचार वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक यूपीए-2 में इसे मौलिक अधिकार की मान्यता दी गई। 1 अप्रैल 2010 के बाद देश में 6 से लेकर 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा अनिवार्य कर दी गई। इस योजना के आने से देश के लाखों बच्चों की शिक्षा की गारंटी सरकार ले रही है।

सूचना का अधिकार

आरटीआई यानि सूचना का अधिकार अधिनियम भी मनमोहन सिंह की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक यूपीए-1 सरकार ने इसे 12 अक्टूबर 2005 में लागू किया गया। इसे सरकारी दफ्तर में भ्रष्टाचार रोकने का एक कारगर कदम माना गया। इसके मुताबिक कोई भी भारतीय नागरिक सरकारी रिकॉर्ड और कागज़ों में दर्ज सूचना प्राप्त कर सकता है।

मनरेगा यानी रोज़गार की गारंटी

एनडीटीवी के मुताबिक मनमोहन सिंह की सरकार ने न्यूनतम रोज़गार की गारंटी देने के लिए साल 2005 में नेशनल रूरल इंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट यानि नरेगा को लागू किया। साल 2010 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी नेशनल रूरल इंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट कर दिया गया। इस योजना के अनुसार सभी नागरिकों को साल में कम से कम सौ दिन के रोज़गार की गारंटी सरकार देगी।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर

सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों के खाते तक सीधे पहुंचाने के लिए मनमोहन सिंह की सरकार ने डीबीटी यानि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना को लागू किया। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अमेरिका परमाणु समझौते के समय मनमोहन सिंह ने अपनी मज़बूती का परिचय तब दिया, जब उनके ही सरकार में शामिल लेफ्ट दलों ने उनसे अमेरिका के साथ यह डील नहीं करने का दबाव बनाया। लेकिन, मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय साख को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ यह डील की। इस समझौते के कारण लेफ्ट पार्टियों ने यूपीए का दामन छोड़ दिया, जिसके बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के गठबंधन के बाद मनमोहन सिंह की सरकार चलती रही।

मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ भी दोस्ताना रिश्ता बनाए रखा।

व्यक्तिगत उपलब्धियां

प्रधानमंत्री बनने से पहले मनमोहन सिंह देश के कई महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुके थे। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 1972 में वे वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे। इसके बाद वे वित्त मंत्रालय के सचिव, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय चयन आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं।

पुरस्कार

मनमोहन सिंह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाज़े जा चुके हैं। साल 1987 में उन्हें देश का प्रतिष्ठित पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया। 1995 में उन्हें इंडियन साइंस कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार दिया गया। 1993 और 1994 वित्त मंत्री के तौर पर उनके शानदार कार्यकाल के लिए एशिया मनी अवार्ड दिया गया। 1993 में वित्त मंत्रालय के बेहतर काम के कारण ही उन्हें यूरो मनी अवार्ड भी दिया गया। इससे पहले 1956 में उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने एडम स्मिथ पुरस्कार दिया था।

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