कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

रिलीज से पहले ही मंटो पर लगा ग्रहण, पीवीआर ने कहा- राजनीतिक कारणों से लगी रोक

यह फिल्म हमेशा विवादों से घिरे रहे लघु कथा लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित है जो सितम्बर 21 को रिलीज़ होने वाली थी

जनता के सवाल:

प्रश्न 1. सेंसर बोर्ड की तरफ से फिल्म मंटो को पास कर दिए जाने के बावजूद क्यों उसकी रिलीज़ रोक दी गयी?

प्रश्न 2. क्यों ऐसी यथार्थवादी फिल्मों पर इस तरह का हमला हो रहा है?

प्रश्न 3. क्या यह हमारे देश के नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है?

उर्दू के मशहूर कहानीकार सआदत हसन मंटो के जीवन पर बनी फिल्म मंटो अपने रिलीज के दिन ही विवादों में घिर गई है। दिल्ली सहित देशभर के सिनेमाघरों में मंटो के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। पीवीआर सिनेमा का कहना है कि विवादों की वजह से यह फैसला लिया गया है। फिल्म को 21 सितम्बर को देशभर में रिलीज किया जाना था।

न्यूजसेंट्रल 24×7 की टीम ने पीवीआर सिनेमा से बात की। पीवीआर के द्वारा कहा गया कि देशभर में फिल्म के शो कैंसिल कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है। सिनेमा ने बताया कि सरकारी सूचना के अनुसार फिल्म को विवादों की वजह से रोक दिया गया है।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल गई थी। 19 सितंबर को फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी की गई थी। पीवीआर सिनेमा का कहना है कि गुरुवार देर रात ही वेबसाइट पर शो के टाइम को अपडेट किया गया था लेकिन राजनीतिक कारणों से शुक्रवार की रात इस पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया गया।

पीवीआर सिनेमा के कॉल सेन्टर की न्यूज़सेंट्रल 24×7 से बातचीत

ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है।

-मंटो

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