कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भयावह हो रही सफाईकर्मियों की हालत: पिछले एक साल में 120 से ज्यादा लोगों ने सफाई के दौरान गंवाई जान, आंकड़ों को अनदेखा कर रही मोदी सरकार

सफाईकर्मियों की मौत का आंकड़ा हरियाणा, उत्तरप्रदेश और गुजरात में सबसे ज्यादा है।

जनता के सवाल:

 

प्रश्न 1 – सफाईकर्मियों की मौत को क्यों अनदेखा कर रही है मोदी सरकार?

प्रश्न 2 – गैर कानूनी होने के बावजूद भी क्यों हो रही सीवरों की मैन्यूअल सफाई?

प्रश्न 3 – मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान की भेंट कब तक चढ़ेंगे लोग? 

देश में सफाईकर्मियों की मौत को लेकर पहली बार आधिकारिक आंकड़े जारी हुए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक हर पांच दिन में कम से कम एक सफाईकर्मी काम करते समय अपनी जान गंवा देता है। यह आंकड़ा नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारीज़ द्वारा किए गए हैं। यह संस्था सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए काम करती है। इसके मुताबिक जनवरी 2017 के बाद से अब तक 123 लोगों की जान सफाई कार्य के दौरान चली गई है।

अंग्रजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस रिपोर्ट को विभिन्न समाचारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर तैयार किया गया है। कहा जा रहा है कि मौत के ये आंकड़े ज्यादा भी हो सकते हैं, क्योंकि इसमें क्षेत्रीय भाषा के अख़बारों में छपे आंकड़ों का ज़िक्र नहीं है।

सफाईकर्मियों की मौत का आंकड़ा हरियाणा, उत्तरप्रदेश और गुजरात में सबसे ज्यादा है। जबकि महाराष्ट्र में पिछले एक साल में मात्र दो ऐसी मौत की घटनाएं सामने आई हैं। गौरतलब है कि 2011 के सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना के अनुसार महाराष्ट्र में 65,181 परिवार ऐसे हैं, जिसका कम से कम एक सदस्य सफाई के कार्य से जुड़ा है।

वहीं मध्यप्रदेश में पिछले एक साल में मौत की कोई ख़बर सामने नहीं आई है।

नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारीज़ के अध्यक्ष मनहर वालजीभाई ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने राज्य सरकारों से ऐसे लोगों के बारे में जानकारी देने की मांग की थी। लेकिन किसी भी सरकार ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि मैन्यूअल सफाई को गैर कानूनी माना जाता है इसलिए सरकारों ने इसकी जानकारी नहीं दी। इंडियन एक्सप्रेस को उन्होंने बताया कि कई बार सफाई के दौरान मारे गए लोगों के परिवारवालों को मुआवज़े की राशि भी समय पर नहीं देने की बात सामने आती है।

‘सफाई कर्मचारी आंदोलन’ के संस्थापक बेजवाडा विल्सन के मुताबिक उन्होंने केंद्र सरकार से कुल तीन सौ ज़िलों में सफाई कर्मचारियों की पहचान कराने की अपील की थी, लेकिन सरकार ने इससे इनकार कर दिया। ‘सफाई कर्मचारी आंदोलन’ के मुताबिक जनवरी 2017 के बाद सफाई के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की संख्या लगभग 300 है।

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