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#metoo: मेनका गांधी ने यौन शोषण के आरोपों की जांच की मांग उठाई, शिकायत करने पर महिलाओं की छिन गई थी नौकरी

यौन शोषण के सभी आरोपी आकाशवाणी के परमानेंट कर्मचारी हैं.

#metoo मुहिम के जरिए बीते कुछ दिनों से ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) में यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने या शिकायत करने पर महिला कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की ख़बरें सामने आ रही हैं. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑल इंडिया रेडियो कैजुअल अनाउंसर एंड कम्पेरेस यूनियन (एआईसीएसीयू) ने महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को पत्र लिखा, जिसके बाद मेनका गांधी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इन मामलों में जांच की मांग की है.

दरअसल, बीते कुछ दिनों से आकाशवाणी के अलग-अलग स्टेशनों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें यौन शोषण की शिकायत करने वाली महिलाओं को काम से निकाल दिया जा रहा है. वही, दूसरी तरफ यौन शोषण के आरोपी का ट्रांसफर कर दिया जा रहा है. जिन लोगों पर यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं, वे सभी ऑल इंडिया रेडियो के परमानेंट कर्मचारी हैं.

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फ़र्स्टपोस्ट की ख़बर के अनुसार ऑल इंडिया रेडियो की धर्मशाला इकाई में काम करने वाली ज्योति पथनिया (45) ने यौन शोषण का दर्द साझा करते हुए बताया, “मैं डबिंग रूम में थी. अचानक सारी लाइट बुझ गईं. मेरे बॉस सुरेश कुमार ने अपनी कुर्सी मेरे पास खींच ली और मुझे पकड़कर किस कर लिया. मैं जड़वत हो गई थी. जब लाइट जली तो मैं सदमें थी और मैंने पूरी रिकॉर्डिंग सदमे में ही की और वो वहां से चले गए. जब अगली शिफ्ट में काम करने वाली मेरी साथी कर्मचारी आई तो मैं रोने लगी.”

एआईसीएसीयू की महासचिव शबनम खानम ने कहा कि प्रसार भारती और सूचना प्रसारण मंत्रालय में इन मामलों की शिकायत करने के बावजूद भी महिलाओं का यौन शोषण और शिकायत करने पर उनकी नौकरी जाने का सिलसिला रूक नहीं रहा है. वहीं, दूसरी ओर यौन शोषण की शिकायतों पर प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पाति का कहना है कि मामले की जानकारी और उसके तथ्यों को जाने बिना वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते.

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