कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

#Metoo कैंपेन: महिला पत्रकारों ने कहा, एम जे अकबर के बयान से निराशा हुई, हैरानी नही

पांच महिला पत्रकारों ने कहा कि वे एम जे अकबर पर लगाए अपने इल्ज़ामों पर क़ायम हैं।

#Metoo कैंपेन में महिला पत्रकारों द्वारा एम जे अकबर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपों पर कल आए उनके बयान के बाद पांच महिला पत्रकारों ने अपने बयान पर टिके रहने की बात कही है।

कल रविवार को भारत लौटने के बाद एम जे अकबर ने अपने बयान में कहा था कि उन पर लगे आरोप आधारहीन हैं और किसी राजनितिक उद्देश्य का नतीज़ा हैं। इस पर पांच महिला पत्रकारों ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ अपनी बातचीत में प्रतिक्रिया दी।

एशियन ऐज की निवासी संपादक सुपर्णा शर्मा ने कहा कि उनके साथ घटी दो घटनाओं पर दिए गए उनके बयानों पर वे क़ायम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अकबर के बयान से निराशा हुई है लेकिन हैरानी नहीं हुई। यह एक लम्बी लड़ाई होने वाली है और वो कानूनी सुझावों के लिए अपने दोस्तों से बात कर रही हैं।

पत्रकार प्रिया रमानी ने भी अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने अकबर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अकबर के ख़िलाफ़ यहाँ कोई षड़यंत्र नहीं रची जा रही है और हमारी उनकी तरह कोई राजनितिक महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं। हम अपनी पेशेवर और निजी जिंदगियों को दांव पर लगाकर अपनी बात यहाँ रख रहे हैं। सच सबसे मज़बूत बचाव होता है किसी भी मानहानि के मामले में और मैं चिंतित नहीं हूँ।”

वहीं सीएनएन से जुड़ी पत्रकार डी पाई कैंप ने अकबर पर आरोप लगाया था कि 2007 में जब वो एशियन ऐज के साथ बतौर इंटर्न काम कर रही थीं, तब अकबर ने उन्हें जबरन ‘किस’ करने की कोशिश की थी। उन्होंने अकबर के बयान का जवाब देते हुए कहा, “मैं (भारत की) नागरिक नहीं हूँ। मैं मतदान नहीं कर सकती। मेरा कोई राजनितिक उद्देश्य नहीं है। लेकिन मेरे पास कागज़ी सबूत है। मेरे पिता ने अकबर को उस घटना को लेकर एक ईमेल लिखा था जिसका जवाब अकबर ने दिया था। मैं उनके बयान से निराश हुई हूँ पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। मैं अपने बयान को लेकर बिलकुल सहज हूँ।”

शुतपा पॉल ने इंडियन एक्सप्रेस से अपनी बातचीत के दौरान कहा कि अकबर का धड़ल्ले से सभी पीड़िताओं के बारे में इस तरह का बयान देना उनके ताक़त के नशे में चूर होना दिखाता है। उन्होंने कहा कि वो अपने अपराधी से डरकर नहीं छुपेंगी। यह लड़ाई हर औरत की लड़ाई है, इन्साफ की लड़ाई है।

इनके अलावा स्वतन्त्र पत्रकार कनिका गहलोत, जिन्होंने कुछ वर्ष अकबर के साथ काम किया था, ने कहा, “मैंने जो भी कहा था मैं उस पर क़ायम हूँ।”

गौरतलब है कि एक तरफ जहां अब तक करीब 14 महिला पत्रकार अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं, वहीं मोदी सरकार उन्हें लगातार बचाने में लगी हुई है। कल अकबर के बयान के बाद ट्विटर पर भी लोगों ने मोदी सरकार का कड़ा विरोध किया।

इसे भी पढ़ें – आक्रोशित ट्विटर यूज़र्स ने मोदी पर अकबर को बचाने के लिए साधा निशाना

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+