कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

#MeToo: CJI रंजन गोगोई पर पूर्व SC महिला कर्मचारी ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

महिला ने मुख्य न्यायाधीश पर लगाए गए आरोप को लिखित शपथ हलफ़नामे में सुप्रीम कोर्ट के 22 जज़ों को भी भेजा है.

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है. एक 35 वर्षीय महिला, जो सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायिका के पद पर कार्यरत थी, ने गोगोई पर आरोप लगाए हैं कि पिछले साल 10 और 11 अक्टूबर को उन्होंने अपने आवासीय कार्यालय पर मेरे साथ यौन संबंध बनाने की जबरदस्ती कोशिश की.

महिला ने मुख्य न्यायाधीश पर लगाए गए आरोप को लिखित शपथ हलफ़नामे में सुप्रीम कोर्ट के 22 जज़ों को भी भेजा है.

लिखित हलफ़नामे में महिला ने लिखा, “उन्होंने मेरे कमर के चारों तरफ़ गले लगाया. अपने हाथों से मेरे शरीर को छूआ. फिर मेरे शरीर को अपने तरफ़ खींचकर दबा लिया.”

महिला ने आगे लिखा, “उन्होंने यह जानते हुए मुझे नहीं जाने दिया जबकि मैं पूरी तरह जम गई थी और उनके गिरफ़्त से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी.”

स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार महिला को 21 अक्टूबर को नौकरी से बाहर कर दिया गया. नौकरी से बर्खास्तगी के पीछे की वज़ह यह बताई गई कि सहायिका ने बिना अनुमति के ही एक दिन की छुट्टी ले ली थी.

महिला ने आरोप लगाए कि यौन उत्पीड़न की घटना के बाद उसके परिवार को काफ़ी परेशान किया जा रहा है. महिल ने लिखा है कि उसके पति और देवर, जो दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल थे, को 28 दिसंबर, 2018 को निलंबित कर दिया गया था, जिसमें कॉलोनी विवाद से जुड़े एक मामले में 2012 में वापस डेटिंग हुई थी.

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे 11 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश के आवास पर ले जाया गया था. वहां न्यायाधीश की पत्नी ने उसे फर्श पर झुककर और अपने पैरों के सामने नाक रगड़ कर माफ़ी मांगने को कहा.

पीड़िता ने आगे दावा किया है कि उसके ख़िलाफ़ झूठा मुक़दमा दर्ज किया गया. जिसमें आरोप लगाया गया कि 2017 में उसने शिकायतकर्ता से 50,000 रुपए लिए हैं. महिला ने आरोप लगाया कि उसे देर रात गिरफ्तार किया गया. हालांकि उसके पति को गिरफ्तार नहीं किया गया था, लेकिन उसे भी पुलिस हिरासत में पीटा गया था. हलफ़नामे के अनुसार उसके बहनोई, उसकी पत्नी और एक पुरुष रिश्तेदार को भी तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था.

पीड़िता ने जजों से अपील की कि यौन उत्पीड़न के साथ मेरे परिवार के प्रताड़ना को लेकर इस मामले की उच्चस्तरीए जांच हो, जिस कमिटी में सेवानिवृत न्यायाधीश हों.

हालांकि इन आरोपों को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने खारिज किया है. जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है और न्यायपालिक को अस्थिर करने की कोशिश हो रही है.

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