कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

#Metoo: एम जे अकबर ने कमरे में बुलाकर मेरा बलात्कार किया: पल्लवी गोगोई

इससे पहले 25 से ज़्यादा महिला पत्रकारों ने अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लग चुका है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पत्रकार एम जे अकबर के ख़िलाफ़ एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया है. इससे पहले भी लगभग 25 महिलाओं ने अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसकी वज़ह से उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. वर्त्तमान में अमेरिका में रह रहीं पल्लवी गोगोई ने वाशिंगटन पोस्ट में अपनी आपबीती लिखते हुए बताया कि 23 साल पहले जब वे 22 साल के थीं तब उन्होंने एशियन ऐज़ में अकबर के अधीन काम करना शुरू किया था. उन्होंने बताया कि चूंकि इससे पहले उनका और उनके कई सहकर्मियों का पत्रकारिता में कोई अनुभव नहीं था, इसलिए वे काम सीख रही थीं और अकबर अक्सर ही उनके साथ ऊंची आवाज़ में बात करते, उनके लेखों को कूड़ेदान में फेंक दिया करते और उनके साथ काफी बुरा व्यवहार करते थे.

ऐसे ही लगभग एक साल काम करने के बाद वे एशियन ऐज के ओप-एड पेज की संपादक बन गईं जिसके बाद यौन हिंसा का दौर शुरू हुआ. उन्होंने बताया कि एक दिन जब वे अकबर को अपना पेज तैयार कर दिखाने के लिए लेकर गईं तब अकबर ने उनके काम की तारीफ करते हुए अचानक ही उन्हें ‘किस’ करने की कोशिश की. लेकिन वह किसी तरह बचकर उनके केबिन से निकल गईं. उन्हें परेशान देख जब उनकी सहकर्मी ने उनसे पूछा तो उन्होंने उस घटना के बारे में उन्हें बता दिया. दूसरी घटना उनके साथ तब हुई जब वे कुछ महीनों बाद एक पत्रिका के लांच के लिए मुंबई गई थीं. वहां एक होटल के कमरे में अकबर ने उन्हें पेज का लेआउट देखने के बहाने बुलाया और फिर से ‘किस’ करने की कोशिश की. इस बार भी वे किसी तरह बचकर वहां से भाग निकलीं. लेकिन, जाते जाते अकबर ने गुस्से में उनका चेहरा खरोंच दिया. इस घटना के बाद जब वे दिल्ली वापस पहुंची तो अकबर बेहद गुस्से में थे, अकबर ने उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी दे दी.

पीड़िता ने आगे बताया कि मुंबई में हुई घटना के बाद वे अकबर से बचने के लिए बाहर के असाइनमेंट्स ढूंढने लगीं. इसी बीच वे एक प्रेमी युगल की हत्या की ख़बर रिपोर्ट करने के लिए दिल्ली से कुछ दूर एक गांव में गयीं. यह असाइनमेंट जयपुर में ख़त्म होने वाला था. जब वे वहां पहुंची तो अकबर ने उनसे उनके कमरे में आकर इस रिपोर्ट के बारे में चर्चा करने के लिए कहा. पीड़िता ने उस दिन की घटना का ब्यौरा देते हुए बताया, ‘उसके होटल रूम में अपनी पूरी ताक़त लगाकर उससे लड़ने के बावजूद मैं उसके शारीरिक ताक़त का मुक़ाबला नहीं कर पाई. वो मुझसे ज़्यादा ताक़तवर था. उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए और मेरा बलात्कार किया. पुलिस में शिकायत करने के बजाय मैं शर्म से भर गई. मैंने इस बारे में उस वक़्त किसी को भी नहीं बताया. क्या कोई मुझ पर यकीन करता? मैंने अपने आपको कोसा. मैं क्यों उस होटल रूम में गई?’

उन्होंने आगे कहा, सबसे ख़राब बात यह थी कि इस घटना के बाद उसकी पकड़ मुझ पर और मज़बूत हो गई. मैंने उससे लड़ना बंद कर दिया क्योंकि मैं असहाय महसूस करने लगी. कुछ महीनों तक वह मुझे ऐसे ही शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान करता रहा. मैं अगर किसी पुरुष सहकर्मी के साथ ठीक मित्रतापूर्ण तरीक़े से व्यवहार कर लेती थी तो वह न्यूज़रूम में गुस्से में चिल्लाने लगता था. बहुत डरावना था वह.’ उन्होंने इसके बाद 1994 में कर्नाटक चुनाव की रिपोर्टिंग की जिसमें उन्होंने बहुत अच्छे से काम किया जिससे खुश होकर अकबर ने उन्हें विदेश जाकर रिपोर्टिंग करने की बात की. उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स और यूनाइटेड किंगडम की वर्किंग वीज़ा मिल गई, जिसके बाद उन्हें लगा कि यौन हिंसा का सिलसिला थम जाएगा लेकिन वे ग़लत थीं.

उन्होंने एक और घटना के बारे में बताया, ‘एक बार लन्दन कार्यालय में उसने गुस्से में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया. उसने मुझे एक पुरुष सहकर्मी के साथ मित्रतापूर्ण तरीक़े से बात करते हुए देख सभी के कार्यालय से जाने के बाद मेरे साथ शारीरिक हिंसा की और मुझ पर मेज़ पर रखी सभी चीज़ें – कैंची, पेपर वेट, आदि फेंकने लगा. मैं वहां से भागकर हाईड पार्क में एक घंटे तक छुपी रही. मुझे याद है कि अगले दिन मैंने इस बारे में अपनी दोस्त तुशिता को बताया. मैंने अपनी माँ और बहन से भी बात की लेकिन विस्तार में कुछ नहीं बता सकी. मेरी हालत का अंदाज़ा उन्हें लग गया था और इसलिए उन्होंने मुझे वापस आने को कहा.’ इस घटना के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर अमेरिका में डो जोंस में काम करना शुरू किया. अब पीड़िता अमेरिका की नागरिक हैं और वहां एक कामयाब पत्रकार हैं. वे अभी नेशनल पब्लिक रेडियो में कार्यरत हैं.

उन्होंने अकबर के बारे लिखते हुए कहा, ‘2 हफ्ते पहले अकबर ने बतौर केंद्रीय मंत्री इस्तीफा दे दिया और ख़ुद पर लगे सभी आरोपों को झूठा और आधारहीन कह दिया और एक महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा भी दर्ज कर दिया. उसे लगता है कि वह अपना सच ख़ुद बना सकता है जैसे कि उसे लगता था कि उसका हमारी शरीरों पर हक़ था. अभी सच बोल कर कोई फायदा नहीं है. बल्कि ये बहुत तकलीफ़ दे रहा है, क्योंकि जिन लोगों के मैं क़रीब हूँ उन्हें मेरी तकलीफ महसूस होगी.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘अकबर ने दूसरी औरतों के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा करने की चेतावनी दी है जो उसके ख़िलाफ़ सामने आएंगी. और शायद मेरे ऐसे लिखने के अपने अंजाम हैं. लेकिन, मैं इसलिए यह लिख रही हूँ क्योंकि मैं जानती हूँ कि एक ताकतवर मर्द के हाथों पीड़ित होना कैसा होता है. मैंने यह उन कई महिलाओं को समर्थन देने के लिए लिखा है जो उसके ख़िलाफ़ अपना सच बोलने के लिए खुलकर बाहर आईं. मैं यह अपने बच्चों के लिए लिख रही हूँ, ताकि वो जानें कि किसी के द्वारा पीड़ित किए जाने के बावजूद हम फिर से उठ कर खड़े हो सकते हैं. और ताकि वे यह भी जानें और कभी भी किसी को भी पीड़ित न करें.’

पत्रकार प्रिया रमानी ने सबसे पहले बुलंद की थी आवाज़

ज्ञात हो कि वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी वह पहली महिला थीं जिन्होंने ट्विटर के ज़रिये अकबर के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की थी. इसके चलते अकबर ने उन पर अपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कर दिया. इस मुक़दमे के बाद भारत के अनगिनत महिला एवं पुरुष पत्रकार रमानी के साथ अकबर के ख़िलाफ़ सही और सच की लड़ाई में निर्भीकता और साहस के साथ खड़े हुए नज़र आए हैं.

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