कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पूरे काम का पूरा दाम, वेतन सहित अपनी तमाम मांगों को लेकर रसोइया संगठन ने सुशासन बाबू को घेरा

दो दिवसीय महापड़ाव को ऐक्टू समेत अन्य केन्द्रीय ट्रेड यूनियनओं जैसे- सीटू, एटक तथा एआईयूटीयूसी ने भी अपना समर्थन दिया.

बिहार में रसोइया संगठनों ने 18 हज़ार वेतन, रसोईयों को सरकारी कर्मी का दर्जा देने, मातृत्व व मासिक अवकास, ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन तथा सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने सहित 15 सूत्री मांग को लेकर बिहार राज्य मध्यान भोजन रसोइया सन्युक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर रसोइयों ने भारी संख्या में एकत्र होकर मुख्यमंत्री का घेराव करने पटना के गर्दनीबाग पहुंचे हैं.

ऐक्टू(AICCTU) से सम्बद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ व अन्य यूनियनों के आह्वान पर बिहार के 2.48 लाख विद्यालय रसोईयों ने 7 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल के 17 वें दिन 23 जनवरी को नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ दो दिवसीय महापड़ाव का आयोजन किया गया.

महापड़ाव में शामिल रसोईया अपने प्रमुख नारों जैसे- रसोईयों को 18000 मानदेय लागू करो, नीतीश-मोदी शर्म करो, रसोईयों के सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करो, पूरे काम का पूरा दाम दो, श्रम-कानूनों का उल्लंघन बंद करो, समाजिक न्याय की आड़ में नहीं चलेगा समाजिक अन्याय-अत्याचार का दस्तूर नहीं चलेगा के साथ मुख्यमंत्री का घेराव किया.

दो दिवसीय महापड़ाव को संबोधित करते हुए बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ (ऐक्टू) की अध्यक्ष सरोज चौबे ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि नीतीश सरकार खुद को समाज के सबसे दबे-कुचले व सामाजिक न्याय की प्रबल दावेदर बताती है लेकिन बिहार के ढाई लाख रसोईयों के साथ सामाजिक अन्याय करने में सबसे आगे है. उनके न्यायप्रिय हक़-अधिकार पर चुप्पी साधे हुए हैं. नीतीश सरकार ‘कानून का राज’ और महिला सशक्तिकरण का ढोंग बन्द करे. आज बिहार में ये हालत है कि एक ही तरह के काम में दो तरह का मजदूरी लागू है, रसोईयों जैसे काम के लिये घरेलू कामगारों को न्यूनतम मजदूरी 6109 रुपए लागू है जबकि विद्यालय रसोईयों को जीवन यापन से बहुत कम मात्र 1250 रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है. वह भी साल के 12 महीनों के बजाए 10 महीनों का ही भुगतान किया जा रहा है.

इसी क्रम में, ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन (AISWF) के अध्यक्ष रामबली प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ आज देशभर के मजदूर आंदोलनरत हैं और स्किम वर्कर्स इसमें आंदोलन के एक संगठित ताकत के रूप में अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र में मौजूद सरकार को सड़क पर उतरकर चुनौती दे रहा है. उन्होंने आगे कहा कि बिहार में नीतीश सरकार वही चाल चल रही हैं जो केंद्र में मोदी सरकार कर रही है. बिहार में खुलेआम श्रम-कानूनों का उल्लंघन हो रहा है. उन्होंने अपनी बात आगे रखते हुए नीतीश कुमार से दलित-अति पिछड़ी जातियों से आने वाली रसोईयों के श्रम का सम्मान करने तथा समान काम का समान वेतन के तहत 18 हज़ार मानदेय लागू करने तथा अविलम्ब वार्ता बुलाकर राज्य के लाखों गरीब बच्चों के हित में मांगे पूरा करने का आह्वान किया.

मुख्यमंत्री का घेराव करते हुए दो दिवसीय महापड़ाव को ऐक्टू समेत अन्य केन्द्रीय ट्रेड यूनियनओं जैसे- सीटू, एटक तथा एआईयूटीयूसी ने भी अपना समर्थन दिया तथा बिहार के संघर्षरत रसोईया कर्मियों के आन्दोलन के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की.

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