कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

वोट नहीं दे पाएंगे उत्तराखंड के लाखों दलित और मुसलमान, वोटर लिस्ट से ग़ायब है नाम, विपक्ष का आरोप- हारने के डर से BJP  चल रही चाल

12 से 13 प्रतिशत लोग मतदान करने से वंचित रह जाएंगे.

आम चुनाव की तारीख़ों का एलान हो चुका है. इसी कड़ी में उत्तराखंड में एक चरण में 11 अप्रैल को चुनाव होना है. लेकिन, हालिया एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि यहां 12 से 13 प्रतिशत लोग मतदान करने से वंचित रह जाएंगे. उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटा है, उनमें करीब 90 प्रतिशत लोग दलित या मुसलमान समुदाय से आते हैं.
न्यूज़क्लिक के मुताबिक चेतना आंदोलन नामक संगठन ने धरमपुर, रायपुर और मसूरी में सर्वे कराए, जिसमें कहा गया है कि अनुमानत: पूरे राज्य में करीब 2 लाख लोग मतदान करने से वंचित रह जाएंगे.
न्यूज़क्लिक से बातचीत करते हुए प्रदेश के प्रोफ़ेसर एस. एन सचान ने कहा है, “इन क्षेत्रों के 12 से 13 प्रतिशत लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, ऐसे में इससे प्रभावित लोगों की संख्या काफ़ी ज्यादा होगी. प्रधानमंत्री कहते हैं कि मतदान हमारा मौलिक अधिकार है. मतदान में भारी संख्या में हिस्सादारी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं. जबकि, दूसरी तरफ़ लोकतंत्र के इस पर्व से लाखों लोग वंचित रह जाएंगे. अगर लोकतंत्र में वंचित तबके के लोगों की भागीदारी नहीं है, तो फिर इसका क्या मतलब है?”
उत्तराखंड में सीपीआई के नेता समर भंडारी ने न्यूज़क्लिक को बताया, “राज्य के नगर निगम चुनावों में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला था. उनमें करीब 2 लाख वोटर मतदान नहीं कर पाए. इस समय विपक्ष चुनाव आयोग से पूरजोर अपील कर रहा है कि एक सर्वे कराकर सभी योग्य मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए.”
उन्होंने कहा, “यह साफ़ है कि भारतीय जनता पार्टी जानबूझकर ऐसे काम कर रही है.”
इधर, बीते हफ़्ते सीपीआई (एम), सीपीआई और कांग्रेस नेताओं ने देहरादून में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके इस मामले पर चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की थी.
न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सीपीआई एम नेता राजेन्द्र नेगी ने कहा है, “यह भारतीय जनता पार्टी की सोची समझी नीति है. उन्हें डर है कि इन समुदायों (दलित और मुस्लिम) के मामले में बुरी नीतियों का ख़ामियाजा अगले चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. यह हमारे लोकतंत्र के लिए बड़ा ख़तरा है.
बता दें कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और अन्य कई राज्यों में भी वोटर लिस्ट से नाम ग़ायब किए जाने का मामला सामने आ चुका है. पिछले साल तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में करीब 22 लाख वोटर मतदान से वंचित रह गए थे.
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