कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी राज में बेरोज़गारी: पांच सालों में मनरेगा में काम मांगने वालों की संख्या 166 करोड़ व्यक्ति से बढ़कर 255 करोड़ पर पहुंची

पिछले एक साल में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत काम मांगने वाले लोगों की संख्या में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

नरेन्द्र मोदी सरकार में देश के ग्रामीण इलाकों के रोज़गार और खेती पर बुरा असर पड़ा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत काम मांगने वाले लोगों की संख्या में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. चालू वित्त वर्ष के 25 मार्च तक मनरेगा के तहत 255 करोड़ व्यक्ति दिन काम हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस में शालिनी नायर की रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल मनरेगा के तहत 233 करोड़ व्यक्ति दिन रोजगार मिला था. इस साल मनरेगा से मिलने वाले रोज़गार की संख्या पिछले आठ सालों से सबसे ज्यादा है यानी काम की तलाश करने वाले लोगों की संख्या में जबर्दस्त इजाफ़ा हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 में मनरेगा के तहत मिलने वाले रोज़गार का आंकड़ा 166 करोड़ व्यक्ति था, इसके बाद लगातार यह आंकड़ा बढ़ता गया. 2015-16 में यह 235 करोड़ व्यक्ति हो गया. इस साल यह आंकड़ा 255 करोड़ व्यक्ति पर पहुंच गया है.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मजदूर किसान शक्ति संगठन के निखिल देव ने कहा है कि बेरोज़गारी और सूखे की स्थिति के कारण लोग मनरेगा का रूख कर रहे हैं. उनका कहना है कि बेरोज़गारी को देखते हुए लोग मनरेगा कि ओर बढ़ रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया है कि गांवों में रोज़गार के अवसर कम हुए हैं, इसलिए मनरेगा में काम करने वालों की संख्या में ईजाफ़ा देखने को मिल रहा है.

बता दें कि मनरेगा योजना के तहत एक व्यक्ति को एक दिन में आठ घंटे काम करना होता है, जिसे एक व्यक्ति दिन माना जाता है.

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