कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आग की लपट पहुंची अपने घर: नोटबंदी से आहत पुरानी RSS शाखा बंद होने के कगार पर

वाराणसी की सबसे पुरानी शाखा धनथानेश्वर में लोग शाखा में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित नहीं होते हैं.

मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा ने केवल आम नागरिक के जीवन पर व्यापक असर डाला बल्कि नोटबंदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सबसे पुरानी शाखा को भी खत्म होने की कगार पर पहुंचा दिया है.

वाराणसी की सबसे पुरानी शाखा धनथानेश्वर के अधिकारी कमल नारायण मिश्रा का कहना है कि शाखा में हमेशा सुबह और शाम दो चैप्टर थे. शाम को की शाखा करीब 1 साल पहले बंद हो गई थी लेकिन अब सुबह की शाखा भी कभी-कभी ही लगती है. उन्होंने कहा कि पहले शाखा में भाग लेने वाले ज्यादातर स्वयंसेवक ब्राह्मण थे. लेकिन बाद में व्यापारी और कारोबारी परिवार के लोग भी शाखा में हिस्सा बन गए थे.

कारवां की रिपोर्ट के मुताबिक काशी के धनथानेश्वर आरएसएस शाखा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि व्यापारी परिवारों के लोग शाखा में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित नहीं होते हैं. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के फ़ैसले की वजह से ऐसा हो रहा है क्योंकि नोटबंदी ने परिवारों को इतनी मुसीबत मे डाल दिया था कि वे लोग अभी तक इस संकट से बाहर नहीं निकल पाए हैं. जिससे शाखा के कामकाज पर व्यापक असर पड़ता है. जो इस समुदाय से संबंधित स्वयंसेवकों पर निर्भर है.

शाखा के पदाधिकारी ने दावा करते हुए कहा कि धनथानेश्वर शाखा इकलौता ऐसा उदाहरण नहीं है जहां नोटबंदी की वजह से शाखा पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार से मोहभंग होने की वजह से व्यावसायिक परिवारों के स्वयंसेवकों की बड़ी संख्या प्रभावित हुई है. जो संघ के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय है.

वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि नोटबंदी के कारण प्रभावित हुए लोगों की संख्या हम रजिस्टर में नहीं दिखा सकते हैं. उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए मान लिजिए कागजों पर उत्तरी वाराणसी में सुबह की 94 शाखाएं लगती हैं लेकिन हकीकत में 94 शाखाओं में से आधी भी काम नहीं कर रही हैं.

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