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आयुष्मान भारत योजना पर चली मोदी सरकार की कैंची, 23 प्रतिशत कम किया योजना का बजट

योजना के क्रियान्वयन के लिए 60 प्रतिशत की अपनी हिस्सेदारी देने से कतरा रही है मोदी सरकार

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जिसे ‘आयुष्मान भारत योजना’ के नाम से भी जाना जाता है को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आ रही है. बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से इस योजना में 800 करोड़ रुपयों की कटौती की जा रही है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग, जिसे इस योजना के क्रियान्वयन का काम सौंपा गया था ने वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र से 7,400 करोड़ रुपयों का बजट मांगा था. सरकार की ओर से 7,200 करोड़ रुपयों की मंज़ूरी दे दी गई थी. मगर दस दिनों पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर आयुष्मान भारत योजना के बजट में कटौती करने को कहा गया. मंत्रालय ने चिट्ठी में लिखा कि इस योजना की वजह से दूसरी योजनाओं के फण्ड में कटौती हो रही है.

वित्त मंत्रालय की ओर से इस अर्ज़ी को स्वीकारते हुए आयुष्मान भारत योजना के लिए इस साल 6,400 करोड़ रुपयों का बजट तय कर दिया गया. बताते चलें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आयुष्मान भारत योजना के साथ ही कई सारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन का काम भी देखता है. इन सभी योजनाओं के लिए मिशन ने अलग से केंद्र से 35,000 करोड़ रुपयों का बजट मांगा था, जिसमे केवल 26,945 करोड़ की ही मंजूरी दी गई थी.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक अधिकारी का कहना है कि जितना बजट हमने मांगा था, मौजूदा साल में उसमें 23 फीसदी की कटौती कर दी गई है. इस योजना के लिए केंद्र को 60 प्रतिशत की अपनी हिस्सेदारी देनी थी, जिसे केंद्र ने नामंजूर कर दिया. इस योजना के चलते राज्यों की सरकारों के ऊपर दबाव बढ़ता जा रहा है. फंड के लिए उन्हें जूझना पड़ रहा है.

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