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मोदी सरकार का शर्मनाक फ़ैसला: अरुणाचल प्रदेश में अफ्सपा कानून को छह महीने के लिए बढ़ाया

अफ्सपा में मिले विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर आम नागरिकों के अधिकारों के हनन के कई मामले सामने आए हैं।

केंद्र सरकार ने एक शर्मनाक फैसला लेते हुए अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में अफ्सपा कानून की अवधि को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है।  इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर  के अनुसार सरकार का यह फ़ैसला अरूणाचल प्रदेश के छह ज़िले और असम की सीमा से लगे छह पुलिस थानों के क्षेत्रों में लागू किया गया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार केंद्र ने इन इलाकों को हिंसा से ग्रस्त होने का दावा करते हुए यह फैसला किया है।

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार का यह फैसला तब आया है, जब अफ्सपा के औचित्य और उसके दुरुपयोग को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है।

ज्ञात हो कि देश के जिन क्षेत्रों में अफ्सपा लागू है, वहाँ से इस अधिकार का सैन्य बलों द्वारा दुरुपयोग करने एवं इस कानून की आड़ में मनमानी करने,फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने और यहाँ तक कि यौन हिंसा करने के भी आरोप लगातार लगते रहे हैं। फिलहाल उक्त कानून की आड़ में सैन्य बलों द्वारा मणिपुर में मुठभेड़ के नाम पर की जाने वाली हत्याओं के मामले की सुनवाई चल रही है।

मणिपुर की इरोम शर्मिला ने इस कानून के खिलाफ 16 वर्षों तक भूख हड़ताल किया था। एक तरफ जहां तमाम सामाजिक और मानवाधिकार संगठन इस कानून की खिलाफत करते आए हैं, सरकार इसकी अवधि बढ़ाकर विवाद खड़ा कर रही है। केंद्र सरकार का यह फैसला बहुत निंदनीय और ख़तरनाक मालूम पड़ता है।

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