कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफ़ेल विवाद: HAL को बिना बताए ही मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था पिछला समझौता

एचएएल के अध्यक्ष आर माधवन ने कहा, "हमें पिछले सौदे को रद्द किये जाने की कोई जानकारी नहीं थी. वे इस सौदे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि अब वे इस सौदे का हिस्सा नहीं है."

राफ़ेल सौदे को लेकर लगातार हो रहे खुलासे के बीच एक और तथ्य सामने आया है. हाल ही में अपने एक बयान में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) कहा कि उन्हें राफे़ल के पुराने सौदे को रद्द करने के बारे में नहीं पता था.

एनडीटीवी की एक ख़बर के मुताबिक़, एचएएल के अध्यक्ष आर माधवन ने कहा, हमें पिछले सौदे को रद्द किये जाने की कोई जानकारी नहीं थी.”

ग़ौरतलब है कि यूपीए की सरकार के कार्यकाल के दौरान किये गए सौदे में एचएएल था लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में इस सौदे को निरस्त कर दिया गया. एचएएल को इस सौदे से बाहर कर दिया गया. इस पूरे मामले में लगातार मोदी सरकार पर यह आरोप लग रहा है कि उन्होंने जानबुझकर एचएएल को सौदे से बाहर कर दस्सॉल्ट एविएशन के साथ नए सिरे से सौदा किया जिसमें रिलायंस को पार्टनर बनाया गया. अब इस पूरे मामले में एचएएल ने सीधे ही अब यह कह दिया है कि उन्हें पिछले सौदे के निरस्त होने की जानकारी नहीं है और वे इस सौदे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि अब वे इस सौदे का हिस्सा नहीं है.

ज्ञात हो कि, यूपीए के कार्यकाल में फ्रांस के दस्सॉल्ट एविएशन के साथ 125 विमानों का सौदा किया गया था जिनमें से 108 विमानों का निर्माण लाइसेंस्ड प्रोडक्शन के तहत एचएएल करने वाली थी एवं बाकी 18 विमानों का निर्माण फ्रांस में होना तो जो योजना के तहत बाद में भारत आना था. इसके बाद मोदी सरकार ने इस सौदे को निरस्त कर एक नया सौदा किया जिसके तहत 125 विमानों के बजाय दस्सॉल्ट एविएशन से सिर्फ 36 पूरी बनी बनाई विमानों की खरीद की गई जिनका निर्माण फ्रांस में ही कर भारत लाया जाएगा.

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