कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी सरकार ने बनाई मूर्ति जबकि बना सकती थी 2 आईआईटी, 5 आईआईएम और भी बहुत कुछ

40192 हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई, 162 लघु सिंचाई योजनाओं की मरम्मत, नवीनीकरण और बहाली के लिए बीमा कवर और 425 छोटे चेक डैम्स का हो सकता था निर्माण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर को सरदार पटेल 143वीं जयंती पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया गया. गुजरात में बनी सरदार पटेल की भव्य मूर्ति स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण पर खर्च धनराशि पर चर्चा भी होने लगी है. ऐसा माना जा रहा है कि सरदार पटेल की मूर्ति पर लगी लागत के स्थान पर मोदी सरकार द्वारा देश में अन्य प्रकार के कई कारागार कार्यों को पूरा किया जा सकता था.

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक सरदार पटेल की प्रतिमा पर 2989 करोड़ रुपये की लागत में दो नए इंडियन इंस्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) परिसर, पांच इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) तैयार किए जा सकते हैं और इसके साथ ही 6 बार मंगल ग्रह के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मिशन भी चलाया जा सकता है.

इतना ही नहीं, एम्स को तैयार करने के लिए लगभग 1103 करोड़ रुपये की लागत लगती है यानी सरदार पटेल की प्रतिमा पर खर्च धनराशि के स्थान पर दो एम्स तैयार किए जा सकते हैं. 528 करोड़ रुपये में 75 मेगावाट बिजली बनाने वाले 5 नए सोलर पावर प्लांट लगाए जा सकते हैं जो कि भव्य मूर्ति में खर्च राशि से कई गुना ज्यादा कारागार साबित होते. इसी मूर्ति की कीमत पर 450 करोड़ रुपये वाले 6 मंगल मिशन और 800 करोड़ रुपये की कीमत वाले चंद्रयान-2 मिशन चलाए जा सकते हैं.

रिपोर्ट में बताया गया कि भव्य मूर्ति पर आई लागत गुजरात में 2017-18 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए आवंटित 365 करोड़ रुपये से आठ गुना ज़्यादा है. राज्य सरकार द्वारा 602 करोड़ रुपये की 56 नई योजनाओं और उनके अंतर्गत जारी 32 परियोजनाओं की पांच गुना है. रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात सरकार ने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 1114 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को शामिल करने को कहा है. सरदार पटेल की मूर्ति की लागत इस प्रस्ताव से दोगुने से भी ज्यादा है. गुजरात सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 40192 हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई, 162 लघु सिंचाई योजनाओं की मरम्मत, नवीनीकरण और बहाली के लिए बीमा कवर लेना और 425 छोटे चेक डैम्स का निर्माण करना शामिल है.

ज्ञात हो कि गुजरात में चल रही दो वॉटर पाइपलाइन जिनकी लागत 90 करोड़ रुपये हैं. इन परियोजनाओं से सरदार पटेल की मूर्ति की लागत दोगुनी से ज्यादा है. पहली परियोजना कडाना जलायश है जिसके ज़रिये दाहोद और महिसागर ज़िलों की 10,000 हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई की जा सकेगी और दूसरी परियोजना सूरत ज़िले की 1800 हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई कर सकते हैं. मज़ेदार बात यह है कि जहां इस प्रतिमा के बजाय इतने सारे जन कल्याणकारी क़दम उठाये जा सकते थे, वहां मोदी सरकार ने आदिवासी किसानों की ज़मीनें छीनकर एक प्रतिमा खड़ी कर दी जिसकी वास्तविकता में उपयोगिता क्या है यह अब समझना काफी मुश्किल मालूम पड़ रहा है.

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