कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी सरकार ने खड़े किए हाथ, कहा – पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम करना हमारे वश में नहीं

4 अक्टूबर को तेलों के दाम में 2.50 रुपए की कटौती के बाद से डीज़ल के दाम में अब तक 2.74 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है।

पेट्रोल और डीज़ल के दामों से राहत मिलना मुश्किल नज़र आ रहा है। अब सरकार ने भी खुले तौर पर कह दिया है कि तेल के दामों पर नियंत्रण उसके हाथ में नहीं है।

ग़ौरतलब है कि बीते 4 अक्टूबर को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल-डीज़ल के दामों में ढाई रुपये की कटौती का एलान किया था। लेकिन, राजधानी दिल्ली में पिछले 12 दिनों में प्रति लीटर 2.50 रुपये की ये राहत न सिर्फ़ ख़त्म हो चुकी है, बल्कि डीज़ल और भी महंगा हो गया है। अब इस सवाल पर सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। और जो संकेत सरकार की तरफ़ से दिए जा रहे हैं, उससे यही लगता है कि और राहत देना उनके बस में नहीं है।

मंहगाई के बाद डीज़ल के दामों में हुई वृद्धि कुछ इस प्रकार है –

4 अक्टूबर, 2018 :   75.45/लीटर
5 अक्टूबर, 2018 :   72.95/लीटर (-2.50/लीटर)
8 अक्टूबर, 2018 :   73.82/लीटर (+ 87 पैसा/लीटर)
11 अक्टूबर, 2018 : 74.62/लीटर (+ 80 पैसा/लीटर)
14 अक्टूबर, 2018 :   75.38/लीटर (+ 76 पैसा/लीटर)
16 अक्टूबर, 2018 :   75.69/लीटर (+ 31 पैसा/लीटर)

एनडीटीवी के अनुसार जब पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद प्रधान से पूछा गया कि क्या वह उन राज्य सरकारों से फिर अपील करेंगे जिन्होंने VAT कम नहीं किया है? तो उन्होंने कहा वे ख़ुद इस जवाब के इंतज़ार में हैं और राज्यों को इसका जवाब देना चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ” ये सभी की ज़िम्मेदारी है। हमने सभी राज्यों से सिर्फ़ वैट कम करने की अपील की थी। हम जानते हैं कि राज्यों की अपनी स्पेंडिंग ज़रूरत हैं। अधिकांश राज्यों ने वैट में कटौती नहीं की।” उन्होंने वैट कम नहीं करने के लिए दिल्ली सरकार को घेरने की कोशिश की।

ज़ाहिर है कि यह मामला और पेंचीदा होता जा रहा है। क्योंकि कई राज्य सरकारें VAT कम करके आम लोगों को राहत देने की स्थिति में नहीं हैं। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद प्रधान ने यह साफ़ कर दिया कि सरकार हर रोज़ पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में बदलाव करने की मौजूदा व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
ज्ञात हो कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में जारी उतार-चढ़ाव की वजह से तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में जब सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं तो आम जनता को तेलों के दाम को लेकर अब राहत की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।

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