कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अडानी को मोदी जी द्वारा हवाई अड्डों के फ़ैसले में आने लगी है भ्रष्टाचार की बू। जानें क्यूं

नागारिक विमानन मंत्रालय ने 27-28 दिसंबर को इस संबंध में हुई बैठकों से जुड़ी रिपोर्ट राज्यसभा समिति को सौंपी है.

मोदी सरकार ने देश के 6 बड़े एयरपोर्ट को राज्य सरकारों से चर्चा किए बिना ही अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को सौंप दिए. यह खुलासा नागरिक विमानन मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में हुआ है.

जनसत्ता की ख़बर मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में लखनऊ, गुवाहाटी, अहमदाबाद, मंगलौर, तिरुवनंतपुरम और जयपुर एयरपोर्ट के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकास और संचालन का विस्तृत ब्यौरा दिया है.

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एआई) एयरपोर्टस प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता है. नागारिक विमानन मंत्रालय ने 27-28 दिसंबर को इस संबंध में हुई बैठकों से जुड़ी रिपोर्ट राज्यसभा समिति को सौंपी है. जिसमें कहा गया है कि एयरपोर्टस की जिम्मेदारी अडानी ग्रुप को देने से पहले राज्यों से नहीं पूछा गया था.

दरअसल, कोलकाता के रहने वाले  सप्तऋषि देब ने एआई के तहत आने वाले एयरपोर्टस के आधुनिकिकरण को लेकर याचिका दायर की थी. इस याचिका पर राज्यसभा की समीति ने मंत्रालय से जवाब मांगा था कि एयरपोर्ट्स पट्टे (लीज) पर देने से पहले क्या राज्यों से सलाह ली गई थी.

वहीं, मंत्रालय ने इस संबंध में निजीकरण को जरूरत बताते हुए कहा है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रोजेक्ट के कारण सर्विस डिलीवरी बेहतर हुई है. लेकिन मंत्रालय ने यह भी कहा कि एयरपोर्टस लीज पर देने से पहले राज्य सरकार या जनता से नहीं पूछा गया था.

ग़ौरतलब है कि मंत्रालय ने 11 जनवरी को राज्यसभा समिति को जवाब देते हुए कहा था कि,  प्रकिया के अनुसार, एआई के एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल के जरिए लीज पर देने से पहले जनता या फिर राज्य सरकार से पूछना जरूरी होता है.

ऐसे में एक फिर मोदी सरकार पर सवाल खड़ा होता है कि आखिर सरकार ने एयरपोर्ट की जिम्मेदारी अडानी ग्रुप को सौंपने से पहले राज्य सरकारों से चर्चा क्यों नहीं की.

इसे भी पढ़ें- भाजपा मंत्री पंकजा मुंडे के मंत्रालय ने ठेका जारी करने में की गड़बड़ी, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 6,300 करोड़ का टेंडर

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+