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मोदी है तो मुमकिन है: तबाही कगार पर पहुंची ONGC, कंपनी के इतिहास में पहली बार नकदी की भारी कमी

मार्च 2017 में ओएनजीसी का कैस रिर्जव 9,511 करोड़ रुपए था. जो सितंबर 2018 में सिर्फ 167 करोड़ रुपए रह गया.

केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था लगातार चरमरा रही है. सरकार की नीतियों के कारण देश की नवरत्न कंपनी ओएनजीसी आर्थिक संकट का सामना कर रही है.

हालात यह हैं कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कंपनी को कर्ज लेना पड़ रहा है. कंपनी कैश रिजर्व के भारी संकट से गुजर रही है.

नवजीवन इंडिया की ख़बर के मुताबिक, पिछले डेढ़ सालों में ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) के नकदी भंडार में 9,344 करोड़ रुपए की कमी आई है.

दरअसल, मार्च 2017 में ओएनजीसी का कैस रिर्जव 9,511 करोड़ रुपए था. जो सितंबर 2018 में सिर्फ 167 करोड़ रुपए रह गया. इन दिनों कंपनी अपने फंड का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए कर रही है.

नवजीवन इंडिया  के अनुसार केंद्र सरकार ने ओएनजीसी के कामकाज में हस्तक्षेप कर गुजरात राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) को बचाने और देश का वित्तीय घाटा कम करने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम में सरकार की 51.11 फीसदी की हिस्सेदारी को 39,915 करोड़ रुपए में खरीदने को मजबूर किया. यह कीमत एचपीसीएल के बाजार मूल्य (उस दिन के शेयर की कीमत के आधार पर) से 14 फीसदी ज्यादा है.

ओएनजीसी ने पिछले साल मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल लिमिटेड (एमआरपीएल) को भी अपने अधिकार क्षेत्र में लिया था. हालांकि, नकद लेन-देन की वजह से इसमें भी अभी समस्या हो रही है.

नवजीवन इंडिया  के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है, “तेल और प्राकृतिक गैस, खनन का व्यवसाय जोखिम भरा होता है. इस व्यवसाय में पर्याप्त मात्रा में कैश बैलेंस की आवाश्यकता होती है. ऐसे में ओएनजीसी के पास कम से कम 5000 करोड़ रुपए का कैश रिजर्व होना चाहिए.”

ओएनजीसी के पूर्व निदेशक (वित्त) आलोक कुमार बनर्जी ने न्यूज पोर्टल ‘द प्रिंट’ को बताया, “63 साल के ओएनजीसी के इतिहास में यह पहला मौका है जब कंपनी का कैश रिजर्व इस स्तर पर पहुंचा है. उन्होंने इस स्थिति को ख़तरनाक बताया है.”

उन्होंने कहा, “यह स्थिति खासकर एचपीसीएल और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के अधिग्रहण की वजह से आई है.”

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