कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

फेल हुई मोदी सरकार की फ़सल बीमा योजना, प्रीमियम जमा करने के बाद भी नहीं मिल रहे पैसे, परेशानी में हजारों किसान

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा ज़िले के 12 से अधिक गांवों के हज़ार से अधिक किसान फसल बीमा योजना की राशि पाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट-काट कर परेशान हो चुके हैं.

किसानों की बेहतरी के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब किसानों के गले की फांस बन गई है. हर दिन किसी न किसी राज्य से इस योजना से जुड़ी किसानों की समस्याएं सामने आती ही रहती है. ताज़ा मामले में छत्तीसगढ़ के बेमेतरा ज़िले के 12 से अधिक गांवों के हज़ार से अधिक किसान फसल बीमा योजना की राशि पाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट-काट कर परेशान हो चुके हैं.

पत्रिका  की रिपोर्ट के अनुसार, सबलपुर सहकारी समिती से जुड़े 6 ग्राम पंचायतों के 12 से अधिक गांव के क़रीब 1260 किसानों को बीमा कराने के बावजूद भी राशि नहीं मिली है. फसल बीमा की राशि पाने के लिए 1260 किसान ज़िला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक का चक्कर लगातार लगा रहे हैं. पिछले साल भी फसल का बीमा कराने के बावजूद भी किसानों को राशि नहीं मिली थी.

अब कई बार शिकायत करने के बावजूद भी अब तक बीते साल की भी राशि उन्हें नहीं मिली है, अब फिर से इस साल भी वहीं समस्या किसानों के सामने आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक़ सबलुपर के सहकारी समिति से जुड़े गांव अमोरा, केसतरा, खेड़ा, तेदुवा, पेंड्डी, बेंवरा, झिलगा, जुनवानीकला, जुनवानी खुर्द, गोढ़ीकला और गोढ़ीखुर्द के किसानों को फसल बिमा की क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिली है.

किसानों ने बताया कि, “हमारे ब्लॉक को पिछले साल कम बारिश होने के कारण अकाल प्रभावित क्षेत्र माना गया था. इससे पहले भी लगातार तीन साल नवागढ़ क्षेत्र को अकाल प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में डाला गया था. लेकिन इसके बावजूद हमें फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.”

लगातार अकाल पड़ने की वजह के किसानों की माली हालत काफी दयनिय हो चुकी है. इसलिए किसानों को फसल से होने वाले नुकसान से बचने के लिए फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा कराया गया था. जिसकी प्रीमियम की राशि किसानों के खाते से काटी गयी थी.

एक बार फिर से अकाल की चपेट में आने के बाद किसानों को बीमा कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति देने में आनाकानी किया जा रहा है. जिसके कारण बीमा कराने के बावजूद भी 1260 किसान राशि के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है.

समिति अध्यक्ष संतोष कुर्रे ने बताया कि “अकाल प्रभावित गांवों के मुखिया दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं. 24 घंटे के भीतर जिला मुख्यालय से लेकर अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा है. राजधानी के बीमा कंपनी में शिकायत दर्ज कराने के बाद फिर से ज़िला कार्यालय पहुंचे हैं.”

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आदर्श आचार संहिता खत्म होने के बाद यदि उन्हें राशि नहीं मिलती है, तो पीड़ित किसान सबलपुर में धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज करेंगे.

दरअसल, ज़िले के अकाल प्रभावित किसानों के लिए बीमा कंपनी ने क्षतिपूर्ति राशि की पहली किस्त 64 करोड़ रुपये जारी किया है. जिसका लाभ नवागढ़ के अधिकतर किसानों को मिला है. लेकिन, राशि से वंचित किसान दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर हैं. पिछले कई सालों से इस समस्या से जूझ रहे किसान अब इससे उकता चुके हैं.

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