कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

गरीबों के साथ धोखाधड़ी, मोदी हुकूमत ने उज्ज्वला योजना का लाभ लेने वालों का नाम बीपीएल सूची से हटाया

जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों ने कहा है कि राज्य सरकार का आदेश है कि जिन्होंने उज्ज्वला योजना का लाभ ले लिया है, उन्हें बीपीएल परिवारों को मिलने वाला राशन और केरोसीन नहीं दिया जाए.

नरेन्द्र मोदी की सरकार ग़रीबों के साथ उज्ज्वला योजना के नाम पर मजाक कर रही है. इस योजना के तहत गैस सिलेंडर लेने वाले लोगों का नाम बीपीएल सूची से हटा दिया गया है और उन्हें केरोसीन (मिट्टी का तेल) और अन्य जरूरी सरकारी लाभों को लेने से रोका जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के पंचमहल ज़िले के मेखर मोर्वा गांव की निवासी शारदा बेन मान सिंह का कहना है कि उनके पास बीपीएल कार्ड था. जून 2016 में उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एक गैस सिलेंडर लिया, इसके बाद जब सरकार से सब्सिडी पर मिलने वाला केरोसीन लेने पहुंची तो जन वितरण प्रणाली की दुकान वाले ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर लेने के बाद उनका नाम बीपीएल सूची से हटा दिया गया है. इसलिए उन्हें बीपीएल परिवारों को सब्सिडी पर मिलने वाले केरोसीन और अन्य सुविधाओं से महरूम होना पड़ेगा.

साबरकांठा ज़िले के रामपुर गांव निवासी लीलाबेन कोनाभाई तकार्दा की भी ऐसी ही कहानी है. उज्ज्वला योजना के तहत उन्होंने 600 रुपए खर्च करके लोकल एलपीजी वितरक से गैस सिलिंडर, स्टोव, रेगुलेटर और गैस पाइप खरीदा. इसके बाद इन्हें भी बीपीएल परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर दिया गया. इन्हें अंत्योदय योजना के तहत मिलने वाले राशन से भी हटा दिया गया.

इन महिलाओं का कहना है कि हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं कि इतने महंगे सिलेंडर को दुबारा भराया जा सके, इसलिए हमने कहा है कि हमारा एलपीजी कनेक्शन वापस लेकर सरकार हमारा नाम फिर से बीपीएल सूची में जोड़ दे, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है.

अहमदाबाद के एनजीओ दिशा फ़ाउंडेशन का कहना है कि जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों ने कहा है कि राज्य सरकार का आदेश है कि जिन्होंने उज्ज्वला योजना का लाभ ले लिया है, उन्हें बीपीएल परिवारों को मिलने वाला राशन और केरोसीन नहीं दिया जाए.

महिलाओं का कहना है कि उनका घर आदिवासी इलाके में है और वहां बिजली कटने की समस्या बार बार आती रहती है, इसलिए हम केरोसीन तेल की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अभी उन्हें केरोसीन तेल काफ़ी महंगे दाम पर बाजार से खरीदना पड़ रहा है.  उज्ज्वला योजना के कई लाभार्थी फिर से चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर हैं.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गुजरात में पिछले साल तक करीब 20 लाख बीपीएल कार्डधारकों ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर लिया था. इसके बाद सर्वे में पाया गया कि जिन लोगों ने उज्ज्वला योजना का नाम लिया उन्हें सरकार ने एपीएल सूची में डाल दिया है. इसका खुलासा बुधवार को हुआ है.

इस अध्ययन में गुजरात के 15 प्रखंडों के 1,080 बीपीएल परिवारों से बात की गई. इनमें से 953 परिवारों को सरकार ने अब एपीएल सूची में डाल दिया है. मात्र 127 परिवारों ने ही माना है कि उन्हें एपीएल परिवार में नहीं डाला गया है.

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