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मोदी सरकार ने छिपाई एक और रिपोर्ट- नहीं बताएगी मुद्रा योजना के तहत कितनों को मिला रोज़गार

अनौपचारिक तौर पर यह फ़ैसला किया गया है कि लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट को चुनाव के दौरान सार्वजनिक नहीं किया जाए.

चुनावी मौसम में मोदी सरकार ऐसे आंकड़े पेश करने से परहेज करती नज़र आ रही है जिससे उसे लोकसभा चुनाव में दिक़्क़तों का सामना करने पड़े. दरअसल केंद्र सरकार मुद्रा योजना के तहत पैदा की गई नौकरियों के आंकड़े अगले 2 महीनों तक सार्वजनिक नहीं करेगी.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनरी एजेंसी (मुद्रा) योजना के तहत कितनी नौकरियों का सृजन हुआ है जिसके आंकड़े चुनाव के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे. दरअसल एक्सपर्ट कमेटी का मानना है कि लेबर ब्यूरो द्वारा निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल की गई पद्धति में अनियमितताएं हैं.

बता दें कि बीते 22 फरवरी को द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार मोदी सरकार नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट खारिज करने के बाद लेबर ब्यूरो के सर्वे के निष्कर्षों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है. लेकिन बीते शुक्रवार को एक मीटिंग में कमेटी ने लेबर ब्यूरो को रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ियों को दुरुस्त करने को कहा है. जिसके लिए ब्यूरो ने 2 महीने का समय मांगा है. हालांकि कमेटी के इस विचार-विमर्श को अभी केंद्रीय श्रम मंत्री की ओर से मंजूरी देना बाकी है.

ख़बर के अनुसार बीते सोमवार को आचार संहिता लागू होने के बाद अनौपचारिक तौर पर यह फ़ैसला किया गया है कि लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट को चुनाव के दौरान सार्वजनिक नहीं किया जाए.

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार की ओर से अभी तक एनएसएसओ और लेबर ब्यूरो की नौकरियों और बेरोजगारी से जुड़ी छठी सालाना रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है. जबकि इन दोनों रिपोर्ट में मोदी सरकार के शासनकाल के दौरान नौकरियों में गिरावट की बात सामने आई थी.

लेबर ब्यूरो की नौकरियों और बेरोज़गारी से जुड़ी छठी सालाना रिपोर्ट में बताया गया था कि साल 2016-17 में बेरोज़गारी दर चार सालों में 3.9 पर्सेंट पहुंच गई है. वहीं, एनएसएसओ की रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2017-198 में बेरोज़गारी दर 45 सालों का रिकार्ड तोड़ते हुए सर्वोच्च स्तर 6.1 पर्सेंट पर पहुंच गई है.

नीति आयोग ने पिछले महीने लेबर ब्यूरो से कहा था कि वे सर्वे को पूरा करके अपने निष्कर्ष 27 फरवरी तक पेश करें ताकि रिपोर्ट को आम चुनाव से पहले घोषित किया जा सके. हालांकि अब यह रिपोर्ट चुनाव के दौरान सार्वजनिक नहीं की जाएगी.

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