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मोदी जी ने इन्टरव्यू में कहा- 2014 से पहले भी गाय के नाम पर हिंसा की घटनाएं होती थीं; नए साल में झूठ बोल गए प्रधान सेवक

मई 2014 के बाद से, गाय से संबंधित नफरत भरे अपराधों में वृद्धि ( 85 घटनाओं में से 98 फीसदी ) हुई है, जबकि 2012 और 2013 में प्रत्येक वर्ष एक घटना की सूचना मिली थी.

गाय को लेकर बढ़ती हिंसा पर प्रधानमंत्री झूठ बोल गए. मंगलवार को एएनआई को दिए इन्टरव्यू में जब प्रधानमंत्री से गाय को लेकर बढ़ती हिंसा पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “क्या 2014 से पहले इसप्रकार की घटनाएं नहीं घटती थीं?” सच्चाई ये है कि 2014 से पहले देश में गाय के नाम पर हिंसा की मात्र दो-तीन घटनाएं सामने आई हैं. जबकि पिछले साढ़े चार सालों के दौरान इसमें बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है.

इंडिया स्पेंड जो देश के अलग-अलग घटनाओं पर विश्वसनीय डेटा इकट्ठा करने वाली वेबसाइट है. उसने 2010 से गाय से संबंधित हिंसा का डेटाबेस बनाया है, जो हिंसा में बढ़ोतरी को दिखाता है. नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है.

मई 2014 के बाद से, गाय से संबंधित नफरत भरे अपराधों में वृद्धि ( 85 घटनाओं में से 98 फीसदी ) हुई है, जबकि 2012 और 2013 में प्रत्येक वर्ष एक घटना की सूचना मिली थी.

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इन मामलों में अधिकतर मुसलमानों को ही टारगेट बनाया गया है. मॉबलिंचिंग की ज़्यादातर घटनाएं भी बीजेपी शासित राज्यों में हुई हैं.

हेटक्राइम वाच भी इन तथ्यों की पुष्टि करता है. इस वेबसाइट के अनुसार 2014 से पहले, ‘गौ-रक्षा’ के नाम पर सिर्फ 3 अपराध किये गए थे – एक 2013 में मध्यप्रदेश में, एक 2012 में पंजाब में और एक 2010 में हिमाचल प्रदेश में.

रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार में घातक हेट क्राइम की घटनाओं में 2200 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. घृणा अपराधों की सबसे ज़्यादा घटनाएं उत्तरप्रदेश में हुई हैं.

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