कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी के मंत्रालय कार्यालय में चल रहा था नौकरी घोटाला, 7 लोगों को किया गया गिरफ़्तार

पीड़ितों को ओएनजीसी के आधिकारिक खाते से ईमेल प्राप्त हुए थे और कृषि भवन में उनका साक्षात्कार लिया गया था।

मंगलवार को पुलिस ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के दो कर्मचारियों सहित सात लोगों को तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में नौकरी देने के बहाने युवाओं को धोखा देने के लिए गिरफ़्तार किया गया है।

आरोपियों की पहचान जगदीश राज(58) संदीप कुमार (31), वसीम (28), अंकित गुप्ता (32), विशाल गोयल (27), सुमन सौरभ (32) और किशोर कुणाल (32) के रूप में की गई। पुलिस ने कहा कि तेल और प्राकृतिक गैस निगम द्वारा दायर शिकायत पर मामला दर्ज़ किया गया था।

पुलिस आयुक्त (अपराध) राजीव रंजन ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि पीड़ितों को ओएनजीसी के आधिकारिक खाते से ईमेल प्राप्त हुए थे और कृषि भवन में उनका साक्षात्कार लिया गया था। पीड़ितों को रणधीर सिंह नामक व्यक्ति से मिलवाया गया जिसने उनसे ओएनजीसी में नौकरियां दिलवाने के लिए 22 लाख रुपये ले लिए।

पुलिस ने अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर कैब बुकिंग, होटल बुकिंग और आरोपी की ऑनलाइन ख़रीददारी पर नज़र रख कर उनके ज़रिये आरोपी किशोर कुणाल को लक्ष्मी नगर में उसके कार्यालय से गिरफ़्तार किया था।

पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि हैदराबाद में एक कंसल्टेंसी देने वाले रवि चन्द्र नाम का व्यक्ति युवाओं को कुणाल से मिलवता था। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरोपी कुणाल पीड़ितों को यह कह कर फंसाते थे कि उसका एक करीबी रिश्तेदार ओएनजीसी में कर्मचारी है और अपने दुसरे सहयोगियों की मदद से नकली साक्षात्कार के लिए कॉल लैटर तैयार करके युवाओं को लुभाते थे।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के कर्मचारी आरोपी जगदीश राज अपने कार्यालय के अन्य अधिकारीयों के कक्ष का इस्तेमाल कर पीड़ितों का साक्षात्कार करते थे उनके अन्य सहयोगी संदीप कुमार कार्यालय में पीड़ितों के प्रवेश को सुनिश्चित करने का कार्य करते थे। जबकि अन्य आरोपी अधिकारी साक्षात्कार आयोजित करते थे।

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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