कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बंद करवाइए घटिया राजनीतिकरण: 8 पूर्व सेनाध्यक्षों समेत 150 से ज्यादा पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी

सेना के पूर्व अधिकारियों ने लिखा है, "सीमापार कार्रवाई का श्रेय राजनेता ले रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुपयुक्त और अस्वीकार्य है."

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चुनावी रैलियों में सेना के शौर्य का इस्तेमाल किए जाने से नाराज 8 सेनाध्यक्षों समेत 150 से ज्यादा सेना के पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद को पत्र लिखा है. सेना के पूर्व अधिकारियों ने कहा है कि चुनावी लाभ के लिए सेना का इस्तेमाल ग़लत है और चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद भी इस पर अमल नहीं किया जा रहा.

राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में सेना के अधिकारियों ने कहा है, “सेना की छवि ग़ैर राजनीतिक और सेक्यूलर रही है, इसी वजह से सेना को लेकर जनता के बीच विश्वसनीयता कायम है. आपको पता है कि सेना के जवानों को राजनीति से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने की छूट नहीं होती. लेकिन, कई अधिकारियों ने हमें बताया है कि मौजूदा परिस्थितियों में सेना के राजनीतिक इस्तेमाल से उनके भीतर नाराज़गी है.”

इसके बाद सेना के पूर्व अधिकारियों ने लिखा है, “सीमापार कार्रवाई का श्रेय राजनेता ले रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुपयुक्त और अस्वीकार्य है. इसके साथ ही सेना को “मोदी जी की सेना” की संज्ञा दी जा रही है. इसके साथ ही राजनीतिक दलों के नेता सेना के पोशाक पहनकर चुनावी कैंपेन कर रहे हैं. सैनिकों खासकर विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की तस्वीरों का इस्तेमाल वोट के लिए किया जा रहा है.”

इसके आगे सेना के पूर्व अधिकारियों ने लिखा है, “सेना के पूर्व अधिकारियों द्वारा मुख्य चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र पर संज्ञान लिया गया है. हमें इस बात की भी खुशी है कि सैनिकों से जुड़े बयानबाजी करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ नोटिस जारी की गई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ भी नोटिस जारी की गई. हालांकि हमें इस बात का दु:ख है कि नोटिस जारी होने के बाद भी इस तरह की बयानबाजी नहीं थम रही. चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, हमें डर है कि सैनिकों का राजनीतिक इस्तेमाल करने के मामले में बढ़ोतरी होगी.”

सेना के पूर्व अधिकारियों ने आगे लिखा है, “हमें विश्वास है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि संवैधानिक नियमों के तहत स्थापित सैनिकों के इस तरह से राजनीतिक इस्तेमाल से सेना के मनोबल पर आघात पहुंचेगा. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नुक़सान हो सकता है. इसलिए हम आपसे यह अपील करते हैं कि सेना के ग़ैर राजनीतिक और सेक्यूलय छवि को बरकरार रखने की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करें. इसलिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि सेना, सेना के पोशाक या चिह्न और सेना से जुड़े किसी भी काम को राजनीतिक रंग देने वाले नेताओं के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए.”

सेना के अधिकारियों ने यह चिट्ठी चुनाव आयोग को भी भेजी है.

बता दें कि चुनाव आयोग ने सख़्त निर्देश दिया है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने चुनावी कार्यक्रमों में सेना का इस्तेमाल वोट मांगने के लिए ना करे. इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेताओं ने अपनी सभाओं में सेना के नाम पर वोट मांगा है.

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इससे पहले दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सेना के पोशाक पहनकर दिल्ली में चुनावी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. इसके साथ-साथ हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय सेना को “मोदी जी की सेना” बताया था.

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इसी साल फरवरी महीने में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ जवानों के एक काफ़िले पर फिदायीन हमला हुआ था. जिसमें तीन दर्जन से ज्यादा जवान मारे गए थे. इसके बाद वायुसेना ने कार्रवाई के तौर पर पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी. वायुसेना के इस कार्रवाई के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी इसका राजनीतिक लाभ लेने में जुट गई है.

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