कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

चुनावी जुमला है PM-KISAN योजना: 40 से ज्यादा किसान संगठनों ने जताया विरोध

भारतीय किसान संगठन के नेता युधवीर सिंह ने कहा है कि किसानों की मुख्य मांग है कि उनके फसलों को वाज़िब दाम मिले. मोदी सरकार किसानों की इस मांग को दरकिनार करती रही है.

देश के 40 से ज्यादा किसान संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा आम चुनावों से ठीक पहले लागू किए गए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का बहिष्कार किया है. किसानों ने इस योजना को “बेकार” बताया है. बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने हर साल किसानों के खाते में 6000 रुपए भेजने का फ़ैसला किया है.

डेक्कन हेराल्ड में प्रकाश कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक “किसानों के आंदोलन की अखिल भारतीय समन्वय समिति” के बैनर तले 40 किसान संगठनों की दो दिवसीय बैठक में यह फ़ैसला लिया गया है. मौजूदा सरकार की नीतियों से असंतुष्ट किसान संगठनों ने आम चुनाव में किसानों की बदहाली को मुख्य मुद्दा बनाने की बात कही है.

भारतीय किसान संगठन के नेता युधवीर सिंह ने प्रेस से बताया, “सरकार को यह योजना बंद करनी चाहिए. किसानों को इस योजना से कोई लाभ नहीं हो रहा है. इस योजना की मांग किसानों ने कभी नहीं की थी. किसानों की मुख्य मांग है कि उनके फसलों को वाज़िब दाम मिले. मोदी सरकार किसानों की इस मांग को दरकिनार करती रही है.”

एक संयुक्त कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के एक किसान नेता विजय जवंदिया ने कहा, “मोदीजी ने किसानों को लेकर जितनी भी घोषणाएं की हैं, वे महज चुनावी जुमले हैं. तीन राज्यों की विधानसभा चुनावों में हार के बाद मोदी सरकार ने इस तरह के फ़ैसले लिए हैं.”

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक किसान संगठनों ने 18 मांगों की एक सूची भी तैयार की है. इसमें किसानों की बिना शर्त ऋण माफी, फ़सलों की लागत से डेढ़ गुणा दाम मिलने की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गई है. इसके साथ ही किसान संगठनों ने हर महीने किसानों के लिए 5,000 से 10,000 रुपए प्रतिमाह इनकम के तौर पर देने की मांग भी की है. किसानों की मांग है कि सभी राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में इन मांगों को शामिल करें.

कर्नाटक राज्य रैठा संघ के नेता चामरसा माली पाटिल ने कहा है कि उत्तर भारत और दक्षिणी भारत के किसान इस मुद्दे पर एकमत हैं कि 2019 में जो सरकार बनेगी उससे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी को ख़त्म करने की मांग की जाएगी. फिलहाल भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी के लिए चीन, ऑस्ट्रेलिया और आसियान देशों के सदस्यों सहित 16 देशों के साथ बातचीत कर रहा है. बैठक में किसान नेताओं ने एकसुर में इस समझौते का विरोध करने की बात कही है.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के किसान नेता अजमेर सिंह लखवाल का कहना है, “मोदी सरकार द्वारा किया जा रहा यह समझौता बहुत ही ख़तरनाक है. इससे खेती से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर नुक़सान पहुंचेगा. इस समझौते के होने से 92 प्रतिशत सामानों से सब्सिडी ख़त्म कर दी जाएगी और सस्ते आयात के रास्ते खोल दिए जाएंगे.

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