कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को बेल देने वाले जज एस मुरलीधर पर टेढ़ी नज़र, ट्रांसफर की तैयारी में कॉलेजियम

जस्टिस मुरलीधर आरएसएस के करीबी और रिज़र्व बैंक के निदेशक एस. गुरुमूर्ति के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला देख रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट के भीतर सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है. कॉलेजियम द्वारा जाने माने जज जस्टिस एस मुरलीधर का ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है. फिलहाल कॉलेजियम में शामिल एक जज के रिटायर होने के कारण यह फ़ैसला टला है, लेकिन आगे एक बार फिर कॉलेजियम में उन्हें हटाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है.

सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कॉलेजियम में शामिल जस्टिस मदन लोकुर रिटायर हो चुके हैं और एक अन्य न्यायाधीश ए.के सिकरी मार्च महीने में रिटायर होने वाले हैं. इस कारण यह फ़ैसला फिलहाल टला है और इसे एक बार फिर लाया जा सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बीते दिसंबर और इस जनवरी महीने में कॉलेजियम में दो बार जस्टिस मुरलीधर को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव लाया गया था.

बता दें कि जस्टिस मुरलीधर सांप्रदायिक हिंसा और व्यक्तिगत आज़ादी से जुड़े कई फ़ैसले देने के बाद चर्चा में रहे हैं. उन्होंने गौतम नवलखा जैसे बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं को जेल भेजने के फ़ैसले पर सवाल उठाए थे. उन्होंने 1986 में हुए हाशिमपुरा नरसंहार मामले में यूपी पीएसी के सदस्यों को भी सजा दिलाई थी. इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को भी सिख दंगा मामले में सजा सुनाई थी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब दिसंबर में जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर का प्रयास किया गया तब कॉलेजियम में शामिल दिल्ली उच्च न्यायालय के एक जज ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया था कि वह जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर के फ़ैसले पर पुनर्विचार करें. इसके बाद जस्टिस लोकुर के सेवानिवृत होने के बाद कॉलेजियम बदलने पर एक बार फिर से यह प्रस्ताव लाया गया.

बीते साल आरएसएस समर्थक और फिलहाल आरबीआई के अंशकालिक निदेशक एस. गुरुमूर्ति ने उनके ऊपर टिप्पणी की थी और इसके बाद दिल्ली न्यायालय ने उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मुक़दमा दर्ज किया था. इस मामले की पहली सुनवाई 11 दिसंबर को की गई थी, जिसके तुरंत बाद जस्टिस मुरलीधर का ट्रांसफर करने का प्रस्ताव कॉलेजियम में लाया गया था.

इस महीने के शुरुआत में उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों के सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति को लेकर विवाद हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने दिसंबर 2018 में लिए गए अपने फ़ैसले को पलट दिया था. इस फ़ैसले में कॉलेजियम ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन के सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति पर रोक लगा दी थी. इसकी जगह पर कॉलेजियम ने फ़ैसला किया है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नत करने का फ़ैसला किया था.

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