कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मध्य प्रदेश: पांच महीने से धूल खा रही हैं मरीजों की सुविधा के लिए खरीदी गई 115 एबुलेंस

प्रदेश में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए पांच साल पुरानी 150 खस्ताहाल एंबुलेस इस्तेमाल की जा रही हैं.

एक तरफ़ लोग सरकारी अस्पतालों में एक अदद सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपए की खरीदी गईं एम्बुलेंस यार्ड में खड़ी धूल खा रही है. मामला है मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का. दरअसल,भोपाल में सड़क हादसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के त्वरित इलाज के लिए सरकार ने 10 करोड़ से अधिक पैसे खर्च कर 115 एम्बुलेंस खरीदी है. लेकिन ये सभी एम्बुलेंस अब तक सड़कों पर नहीं दौड़ सकी हैं.  पिछले पांच महीने से भौंरी के पास ऑटोमोबाइल कंपनी के यार्ड में खड़ी हैं.

दैनिक भास्कर की ख़बर के अनुसार एम्बुलेंस का अब तक फेब्रिकेशन वर्क (एम्बुलेंस में मेडिकल उपकरणों के इंस्टॉलेशन समेत जरुरी मोडिफिकेशन) नहीं हो पाया है. जबकि इस काम के  लिए अगस्त 2018 में 4 करोड़ 60 लाख रुपए स्वीकृत किए जा चुका है. ग़ौरतलब है कि प्रदेश में अभी पांच साल पुरानी 150 खस्ताहाल एम्बुलेस इस्तेमाल की जा रही हैं.

ज्ञात हो कि 150 एम्बुलेंस में से 115 को नई एम्बुलेंसों से बदला जाना था, लेकिन देर होने की वजह से शहरी क्षेत्रों में ‘एंबुलेंस 108’ का रिस्पांस टाइम 20 से बढ़कर 25 मिनट हो गया है. जिसकी वजह से मरीजों को फ़र्स्ट एड पांच मिनट देरी से मिल रहा है.

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