कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मुंबई की इन महिलाओं ने सांप्रदायिक सौहार्द की कायम की मिसाल, मुस्लिम समुदाय की बच्ची के साथ हुए भेदभाव के ख़िलाफ़ उठाई आवाज़

मलाड के रॉयल ऑयसिस सोसाइटी की महिलाओं ने मुस्लिम परिवार को भरोसा दिलाया कि उनके बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा.

मुंबई के मलाड में एक हाउसिंग सोसाइटी की महिलाओं ने सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की है. यहां एक मुस्लिम बच्ची के साथ धर्म के नाम पर हुए भेदभावपूर्ण बर्ताव पर सोसाइटी की महिलाएं सामने आईं और भरोसा दिलाया कि वे सभी धर्मों और विश्वासों का सम्मान करने की सीख अपने बच्चों को देंगी.

मामला, बीते शनिवार, 7 सितंबर का है. मुंबई मिरर के मुताबिक मलाड के रॉयल ऑयसिस सोसाइटी में मुस्लिम समुदाय की एक छ: वर्षीय बच्ची अपनी सोसाइटी के बच्चों के साथ खेलने गई थी. वहां कुछ बच्चों ने उस मुस्लिम लड़की की धार्मिक पहचान का मजाक उड़ाया. इसके बाद बच्ची की मां ने इस पूरे वाकये को सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में लिखा, जिसके बाद सोसाइटी की कम से कम 12 महिलाएं उनके समर्थन में आईं और उन्हें सांत्वना दिया कि ऐसी बातें उनकी सोसाइटी में नहीं चलेंगी. इसके बाद बच्ची के धार्मिक पहचान का मजाक उड़ाने वाले बच्चों के परिजनों से सोसाइटी की महिलाओं ने मुलाकात की. परिजनों ने कहा कि बच्चों ने दूसरे लोगों से ऐसे विचार सिखे होंगे. फिर परिवार वालों ने बच्चों को बताया कि वे सभी का सम्मान करें.

इसके बाद सोसाइटी के महिलाओं की एक बैठक हुई, जिसमें तय हुआ कि इस तरह का वाकया आगे से नहीं होगा. महिलाओं ने तय किया कि अब से वे लोग सभी पर्व और त्यौहार एक साथ मिलकर मनाएंगे ताकि बच्चों को आपसी भाइचारे का महत्व पता चले.

मुंबई मिरर के मुताबिक मुस्लिम बच्ची के परिजनों का कहना है कि अब वे आश्वस्त हैं कि उनके बच्चे सही वातावरण में पल बढ़ रहे हैं. अब सोसाइटी के बच्चे एक बार फिर से एक साथ खेल रहे हैं.

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