कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

हादसों से नहीं सीख रहा रेलवे, दस लाख यात्रियों की क्षमता वाले स्टेशन पर नहीं है एक भी एम्बुलेंस

ठाने जीआरपी के अधिकार क्षेत्र में 10 रेलवे स्टेशन आते हैं और इनके बीच केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध है।

देश में रेल दुर्घटना आम बात हो गई है। हर साल एक न एक बड़ा हादसा हमारे सामने आ ही जाता है। इन हादसों के बाद हमारी सरकारें मुआवज़े की घोषणा करके निकल जाती हैं। लेकिन, इससे निपटने के लिए इसके पूर्व की तैयारियों पर विचार करें तो अचंभित होना पड़ेगा। ऐसी ही एक लापरवाही मुंबई के दिवा जंक्शन पर देखने को मिली है।

मुंबई के दिवा जंक्शन पर आपात स्थिति में इलाज़ के लिए एक भी एम्बुलेंस नहीं है। इसके कारण यहां बीते पंद्रह दिनों में दो लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जनसत्ता के अनुसार एचटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ठाने जीआरपी के अधिकार क्षेत्र में 10 रेलवे स्टेशन आते हैं और इनके बीच केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध है। ग़ौरतलब है कि हर साल 200 से अधिक हादसे इन स्टेशनों पर होते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ठाने जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी आर शिरतोड़े ने बताया, “एंबुलेंस की सुविधा ठाने रेलवे स्टेशन पर है। दिवा-कलमबोली रेलवे लाइन ठाने स्टेशन से दूर है, जिसके कारण दुर्घटना स्थल पर पीड़ित की जान बचाने के लिए हादसे के तुरंत बाद पहुंचना संभव नहीं हो पाता है। इसमें वक़्त लगता है। इसका एक कारण दिवा-कलमबोली मार्ग पर सड़कों की जर्जर हालत भी है।”

हाल ही में हुए एक हादसे के बाद यह मामला सामने आया था। जब कलमबोली रेलवे स्टेशन पर एक 24 साल का शख़्स लंबी दूरी की एक ट्रेन से गिर गया था। तब उसके दोस्त ने आरोप लगाया था कि पनवेल स्टेशन के अधिकारियों ने चिकित्सकीय सुविधा देने से इंकार कर दिया था जिसके कारण उसकी मौत हो गई और उसका शरीर घंटों तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा। आख़िरकार उसके दोस्तों ने शव को लेकर ठाने के सिविल अस्पताल गए। तब तक हादसे को हुए पूरे 9 घंटे बीत चुके थे। ठाने के सरकारी रेलवे पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को लिखा था। लेकिन, उधर से कोई जवाब नहीं आया है।

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