कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

गुरुग्राम हिंसा: अपने घर को बेचकर उत्तर प्रदेश जाने को मजबूर हुआ भीड़ की हिंसा का शिकार मुस्लिम परिवार

हमले में घायल परिवार के एक सदस्य ने कहा कि “वे लगातार दहशत के साये में रह रहे हैं और अपने बच्चों को लेकर काफी चिंतित हैं.”

होली के दिन गुरुग्राम भोंडसी के धमसपुर गांव में भीड़ के हमले के शिकार परिवार ने अपना घर बेचकर उत्तर प्रदेश के बागपत में अपने गांव वापस जाने का फैसला किया है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोमवार को पीड़ित परिवार के करीब 30 से अधिक रिश्तेदारों ने बैठक कर यह फैसला लिया. हमले में घायल परिवार के एक सदस्य ने कहा कि “वे लगातार दहशत के साये में रह रहे हैं और अपने बच्चों को लेकर काफी चिंतित हैं.”

इस घटना के शिकायतकर्ता मोहम्मद दिलशाद ने कहा कि हमने घर बेचने के लिए कुछ प्रॉपटी डीलरों से बात की है. उन्होंने बताया कि उनके भाई ने भी सोमवार को बादशाहपुर के कुछ प्रॉपर्टी डीलर से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द घर बेच दें. उनका कहना है, “हमने अपने मेहनत की कमाई से करीब 42 लाख रुपए खर्च कर साल 2016 में इस घर को बनाया था. लेकिन, अब इसे कम क़ीमत पर भी बेचने के लिए तैयार हैं. हम बस यहां से अपना बिजनेस ख़त्म कर अपने गांव बागपत वापस लौटना चाहते हैं.”

यह मुस्लिम परिवार गुरुग्राम से 72 किलोमीटर दूर बागपत के पांची गांव के रहने वाले हैं. साल 2005 में ये लोग पांची से गुरुग्राम आये और 2015 तक किराए के घर में रह रहे थे. बादशाहपुर में ये लोग फर्नीचर का कारोबार करते हैं.

दिलशाद ने कहा कि कुछ लोग घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं और हम इसका हिस्सा नहीं बनना चाहते. हम न्याय के लिए लड़ रहे हैं और हम उनलोगों शुक्रगुजार हैं, जो हमसे यहां मिलने आये और हमारा समर्थन किया.

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कहा कि इस घटना से घर के बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ा है.

घर की मालकिन और छह बच्चों की मां समीना ने कहा कि इस घटना के बाद से बच्चों ने स्कूल जाने से इनकार कर दिया और वो सो भी नहीं रहे हैं. उन्हें हमेशा ये डर लगा रहता है कि हमलावर फिर से वापस आ जाएंगे और उन्हें ज़िदा जला देंगे. उन्होंने कहा कि हम कमजोर और असहाय हैं और इस गांव में रहकर अपने जीवन को ख़तरे में नहीं डाल सकते.

बता दें कि होली के दिन मुस्लिम परिवार के बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे. इसी दौरान पड़ोसी गांव के दो युवक से किक्रेट खेलने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया. इसके बाद 15 से 20 लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडों के साथ साजिद सिद्दकी व समीना के घर पर हमला बोल दिया. परिवार के सदस्यों के अलावा साजिद के रिश्तेदार भी घर में मौजूद थे. हमलावरों ने घर के 12 सदस्यों के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया और क़ीमती सामानों को लूट लिया.

परिवार के एक सद्स्य ने कहा कि भीड़ ने बच्चों को भी नहीं बख्शा. हमले से डरकर बच्चे अलमीरा में छुपे हुए थे. उन्हें भी खींच कर मारा गया.

साजिद के भाइयों में से एक अख्तर सिद्दकी ने कहा कि वह यहां से जाना नहीं चाहते थे, क्योंकि यहां उनका फर्नीचर का व्यवसाय अच्छा चल रहा था. लेकिन अब उनके पास शहर छोड़ने के अलावा औऱ कोई और विकल्प नहीं है. यहां सिर्फ दो मुस्लिम परिवार रहता है और स्थानीय लोग हमारा समर्थन नहीं कर रहे. यदि हम आरोपियों के साथ समझौता नहीं करते हैं तो वे लोग हमें यहां शांति से नहीं रहने देंगे.

वहीं, इस मामले पर पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) हिमांशु गर्ग का कहना है कि परिवार को उचित सुरक्षा दी गयी है और पुलिस की एक टीम उनके घर के बाहर तैनात की गई है. उन्होंने कहा कि हम इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच करेंगे साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले.

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