कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Exclusive: बेगूसराय में गोमांस के शक पर भीड़ ने किया मुस्लिम व्यक्ति पर जानलेवा हमला, पुलिस ने पीड़ित पर दर्ज की FIR

48 वर्षीय इस्तेखार अस्पताल में भर्ती हैं. परिवार का कहना है कि उनकी हालत नाज़ुक है.

बिहार के बेगूसराय में बीते शुक्रवार को कथित गोमांस को लेकर भीड़ के द्वारा हिंसा की घटना सामने आई है. घटना में 48 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति मोहम्मद इस्तेखार की बेरहमी से पिटाई की गई है. उसे लाठी-डंडों से पीटा गया. गंभीर रूप से घायल मो. इस्तेखार को बेगूसराय के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

ज़िला बेगूसराय के तेघरा थाना में मो. इस्तेखार के द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, वह शुक्रवार की सुबह 8.30 बजे तेघरा बाज़ार से मीट को लेकर अपने गांव धनकौल जा रहा था. इसी बीच आलापुर गांव के कुछ लोगों ने लाठी-पिस्तौल के साथ उस पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया. भीड़ ने उसके साथ गाली गलौज करते हुए जान लेने की नियत से पिस्तौल के बट से हमला किया.”

इस्तेखार ने लिखित रिपोर्ट में यह भी बताया है कि उसके पास उस मौज़ूद 15 हज़ार रुपए भी छीन लिए गए.

लिखित शिकायत की कॉपी

न्यूज़सेन्ट्रल24×7 ने इस मामले को लेकर तेघरा थाना में बात की. थानाध्यक्ष के गैरमौजूदगी में प्रभारी सुमन चौधरी ने बताया कि आलापुर के बगर में मु्स्लिमों का गांव धनकौल है. व्यक्ति साईकिल से कथित मांस ले जा रहा था. लोगों ने इसे लेकर उसकी पिटाई कर दी है. दोनों तरफ़ से मामला दर्ज करवाया गया है. फिलहाल प्राप्त मांस को फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा.”

हालांकि सुमन चौधरी से जब एफ़आईआर की कागज और पीड़ित परिवार को कॉन्टैक्ट नंबर मांगा गया तो उन्होंने बताया कि मैं अभी थाने में नहीं हूं. तेघरा से तीस किलोमीटर दूर बेगूसराय आया हूं. इसलिए मदद नहीं कर पाऊंगा.

घर वालों का कहना है कि वह मांस गाय का नहीं बल्कि भैंस का था. पुलिस ने उन्हें अब तक एफ़आईआर का कागज नहीं दी है. न्यूज़सेन्ट्रल24×7 से बात करते हुए इस्तेखार की पत्नी जुलेखा ने बताया कि “घर में बेटी को देखने के लिए कुछ मेहमान आए थे. इसीलिए वो बाज़ार मांस लाने गए थे. वो भैंस का मांस था गाय का नहीं. कुछ बकरी और मुर्गे का भी था. लेकिन रास्ते में कुछ लोग शराब पी रहे थे, उन्होंने इस्तेखार को लोहे के रड से मारा, पत्थर से भी मारा. इतना मारा कि वो एकदम सीरियस हो गए.”

इस्तेखार के साला मोहम्मत मुमताज़ आलगम कहते हैं, “गो का मांस नहीं था, वह मांस भैंस का था. जब सरकार कानूनी तरीके से बेचने का आदेश दी है और आदमी खरीद भी रहा है तो हमलोग और आपलोग उसमें क्या कर सकते हैं. बन रहा है तब ही तो हम खा रहे हैं. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है पहले भी हुआ है. हमें तंग किया जाता रहा है. लेकिन इस बार चुनाव है तो खासकर इसे अंजाम दिया गया है.”

इस्तेखार साईकिल से कपड़ा ढुलाई का काम करते हैं. उनके दो लड़की और दो लड़के हैं. लड़की को देखने ही कुछ मेहमान घर पर आए थे. बहन परवीन बताती हैं, “पहले भी घटना यहां घटी है लेकिन हमने जाने दिया. लेकिन इस बार तो बहुत मारा गया है. पैसे भी छीन लिए गए.”

फ़ोटो- ट्विटर(@imMAK02)

बता दें कि बिहार गो-हत्या को लेकर आंशिक प्रतिबंधों वाले राज्य में शामिल है.गो-हत्या पर पूरे प्रतिबंध के मायने हैं कि गाय और बछड़े की हत्या पर पूरा प्रतिबंध लेकिन बैल, सांड और भैंस को काटने और खाने की इजाज़त है.

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