कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

वीडियो: नसीरूद्दीन शाह ने पढ़ी संविधान की प्रस्तावना, टीएम कृष्णा ने अलग अंदाज में गाया राष्ट्रगान

एनडीटीवी से बातचीत में टीएम कृष्णा ने बताया कि राष्ट्रगान सिर्फ भारत की भौगोलिक सीमा से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि ये सभी भारतीय लोगों की आत्मा है.

नागरिकता संशोधन क़ानून के मुद्दे पर देश भागों में बंट गया है. एक तरफ़ ऐसे लोग हैं जो मुसलमानों से नफ़रत के कारण इसका समर्थन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ वो लोग हैं जो संविधान में दी गई धर्म-निरपेक्षता को बचाने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं. जो लोग समर्थन में हैं, वो अपनी रैलियों में गोली मार देने की बात कर रहे हैं. जो विपक्ष में हैं उनके हाथों में तिरंगा है और वे संविधान की प्रस्तावना का पाठ कर रहे हैं.

इस देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बीच फिल्म कलाकार नसीरूद्दीन शाह और सामाजिक कार्यकर्ता टीएम कृष्णा का एक वीडियो सामने आया है. कारवां-ए-मोहब्बत के इस वीडियो में नसीरूद्दीन शाह संविधान की प्रस्तावना पढ़ रहे हैं और टीएम कृष्णा राष्ट्रगान गा रहे हैं. राष्ट्रगान को पारंपरिक ढंग से अलग और मार्मिक आवाज़ में प्रस्तुत किया गया है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

टीवी चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए टीएम कृष्णा ने कहा कि राष्ट्रगान देश की भावनाओं का प्रतीक है. यह सिर्फ भारत की भौगोलिक सीमा से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि राष्ट्रगान और प्रस्तावना यहां के सभी लोगों की आत्मा है. उन्होंने कहा कि इस समय राष्ट्रवाद को लेकर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में हम सबको संविधान की प्रस्तावना के विचारों का व्यापक प्रचार प्रसार करना चाहिए.

टीएम कृष्णा ने आगे कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून मुस्लिम समुदाय के लोगों को अलग-थलग करने के लिए लाया गया है. अगर सिर्फ धार्मिक प्रताड़ना झेल रहे लोगों को ही बुलाना था तो पाकिस्तान के अहमदिया, श्रीलंका के तमिल और म्यामांर के रोहिंग्या शरणार्थियों को भी इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया.

नागरिकता क़ानून के समर्थन में प्रधानमंत्री मोदी ने एक कैंपेन की शुरुआत की है. सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता शहरों में जा-जाकर अपना पक्ष सामने रख रहे हैं, लेकिन नफ़रत के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में देश के सभी अमन-पसंद लोग एकजुट हैं.

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