कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आपातकाल का नया चेहरा – हिन्दुत्ववादी एकबोटे और भिड़े घूम रहे हैं खुली हवा में और मानवाधिकार कार्यकर्ता जा रहे हैं जेल

अब तक पुलिस वर्नोन गोंसाल्वस, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर चुकी है।

आज महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गयी गिरफ्तारियों की कड़ी में अब गौतम नवलखा और अरुण फरेरा का भी नाम जुड़ चुका है। गौरतलब है कि आज सुबह से महाराष्ट्र पुलिस द्वारा भीमा कोरेगांव की घटना के मद्देनज़र दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, गोवा और रांची में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों एवं शिक्षाविदों के घरों पर छापा मारा गया। इनमें वर्नोन गोंसाल्वस, अरुण फरेरा, सुधा भारद्वाज, स्टैन स्वामी, वरवरा राव, क्रांति, नसीम और आनंद टेलटुम्ब्ड़े थे। अब तक पुलिस वर्नोन गोंसाल्वस, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर चुकी है।

ज्ञात हो कि इस वर्ष जून में भी महाराष्ट्र पुलिस ने नागपुर यूनिवर्सिटी की शोमा सेन, दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन, राजनितिक पत्रिका के संपादक सुधीर धावले, वरिष्ठ मानवाधिकार वकील सुरेन्द्र गाडलिंग एवं टीआईएसएस के पूर्व छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता महेश राउत को भी गिरफ्तार किया गया था।

अजीब बात यह है कि इन सभी गिरफ्तारियों से पहले संभाजी भिड़े एवं मिलिंद एकबोटे को इसी साल जनवरी में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा को भड़काने का मुख्य आरोपी होना बताया गया था। लेकिन पुलिस द्वारा उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं लिए गए।अचानक ही अपना रवैय्या बदलते हुए पुलिस ने इस हिंसा के पीछे ‘नक्सल एवं उनके हमदर्दों’ का हाथ होना बताया।

गौर करने वाली बात यह है कि इस कड़ी में शोमा सेन से लेकर गौतम नवलखा तक जितने भी लोग गिरफ्तार हुए हैं, सभी किसी न किसी रूप में सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं एवं मज़दूरों, दलितों, महिलाओं एवं अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में इन गिरफ्तारियों के पीछे सरकार की मंशा क्या है यह समझ पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

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