कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

वाह न्यू इंडिया! मूर्तियों पर लुटाओ हजारों करोड़, JNU के छात्रों पर बरसाओ लाठियां

जैसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से हमारे भीतर एकता और राष्ट्रवाद की भावना जग गई उसी तरह स्टैच्यू ऑफ मां सरस्वती बना देना चाहिए, इससे हम विश्वगुरु बन जाएंगे.

हे मिडिल क्लास के महारथियों! मंदिर बन रहा है. बस इसी बात से खुश हो जाइए. देश की सभी समस्याएं खत्म होने वाली है. बच्चों की पढ़ाई और पढ़ाई के बाद रोज़गार की व्यवस्था भी की जा चुकी है. हम रातोंरात धनाढ्य हो गए हैं. हमारे घर पैसों से भर गए हैं. हमें जेएनयू जैसे संस्थान की जरूरत नहीं. सस्ती और अच्छी पढ़ाई फोकट की बात है. हमें नहीं चाहिए.

आइए हम हिन्दू राष्ट्र की तरफ़ बढ़ते हैं. भाला-फरसा-तलवार चलाने की ट्रेनिंग देकर हमें अपने बच्चों से धर्म की रक्षा करानी है. धर्मो रक्षति रक्षित: का नारा याद रहे. जेएनयू में 30 साल-32 साल के युवा (आपकी नज़र में बुजुर्ग) शोध करके देश की संपत्ति का नाश कर रहे हैं. इसलिए हमें 3000 करोड़ की लागत से एक और मूर्ति लगानी चाहिए. जैसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से हमारे भीतर एकता और राष्ट्रवाद की भावना जग गई उसी तरह स्टैच्यू ऑफ मां सरस्वती बना देना चाहिए, इससे हम विश्वगुरु बन जाएंगे.

इसके लिए जरूरी है कि हम प्रोपगैंडा आधारित मीडिया की बातों में आएं. जेएनयू की लड़कियों की फोटोशॉप तस्वीरें वायरल करके अश्लील बातें लिखें.

और अंत में, हे इस देश के मजदूर- आदिवासियों! अब बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजने का सपना मत देखना. दिल्ली को नया निज़ाम मिला है. वह पढ़ाई-लिखाई में मुनाफ़ा देखता है. आपसे पैसे लेकर बचाए जाएंगे डूबते हुए बैंक, मार खाती अर्थव्यवस्था और कभी नहीं आने वाले “विकास” के सपने को फिर से किसी चुनाव में बेचने के लिए होगा इलेक्टोरल बॉन्ड का जुगाड़.

देश के नौजवान छात्रों! जेएनयू को देखकर डर जाओ. अब अपने ही कॉलेज में बंदी बना दिए जाओगे. मनमाने फीस का विरोध करने का कभी मत सोचना. सरकार नहीं छोड़ेगी. जिस सरकार बहादुर ने बिना आंख वाले शशिभूषण पाण्डेय को जानवरों की तरह मारा, वो तुम्हें छोड़ेगी?

जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष बताती हैं कि जेएनयू के 23 प्रतिशत छात्रों की पारिवारिक आय उतनी नहीं है, जितनी बढ़ोतरी फीस में की गई है. ऐसे छात्र कहां जाएंगे? मैं कहता हूं कि ये तो न्यू इंडिया है. इसमें वैसे लोगों की जरूरत कहां जो फटे-पुराने कपड़े और चप्पल पहनकर पढ़ाई करते हैं. न्यू इंडिया के जेएनयू में अब ड्रेस कोड होगा. जिसकी हैसियत इसके लायक ना हो, दुष्यंत कुमार के शब्दों में वो- “चलो यहां से चले और उम्र भर के लिए”

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