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नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा: लैंगिक समानता सहित कई मामले में काफी बुरी स्थिति में है भारत

भारत में कार्यबल का सिर्फ 32 प्रतिशत हिस्सा ही महिलाएं हैं.

नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लैंगिक समानता के मामले में भारत का प्रदर्शन बेहद ख़राब हो रहा है. इस रिपोर्ट में सतत विकास लक्ष्य (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स – एसडीजी) पर भारत का प्रदर्शन दिखाया गया.

द टेलीग्राफ की एक ख़बर के मुताबिक़ नीति आयोग की इस रिपोर्ट में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लैंगिक समानता के लिए पॉइंट्स का औसत 100 में से 36 रहा. लैंगिक समानता के मामले में उत्तर प्रदेश ने सबसे निचला स्थान प्राप्त किया. देश भर में प्रति 3 में एक महिला के साथ पति द्वारा हिंसा की जाती है. देश में प्रति 1000 लड़कों पर 898 लडकियां पैदा होती हैं. भारत के कार्यबल की सिर्फ 32 प्रतिशत ही महिलाएं हैं और पुरुषों से औसतन 30 प्रतिशत कम कमाती हैं. घरेलू हिंसा के मामले सिक्किम में सबसे कम यानि 3.5 प्रतिशत हैं और सबसे ज़्यादा मणिपुर में यानि 54.7 प्रतिशत है.

इसी तरह कुछ अन्य बिन्दुओं पर भी देश में महिलाओं की अवस्था को आंका गया. इस रिपोर्ट में दिए गए कुछ आंकड़ों के अनुसार मातृत्व लाभ के लिए योग्य महिलाओं में से 63.6 प्रतिशत महिलाओं को ये लाभ नही मिलता है. इसके अलावा देश की 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक़ हमारे देश में प्रति एक लाख जीवित बच्चों पर 237 मातृ मृत्यु होती है.

इसके अलावा भारत में 56.2 प्रतिशत घरों में साफ़ खाना पकाने का इंधन उपलब्ध नहीं है जिसकी वजह से भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है. इसकी वजह यह है कि अभी भी औरतें ही ज़्यादातर घरों में खाना पकाने का काम करती हैं. इस मामले बिहार ने सबसे निचला स्थान प्राप्त किया है, जहां सिर्फ 17.8 प्रतिशत घरों में ही  खाना पकाने के इंधन की उपलब्धता है.

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