कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बेरोज़गारी पर मोदी सरकार के बचाव में उतरे नीति आयोग के उपाध्यक्ष, पत्रकारों के सवाल में उलझे तो हुई जगहंसाई

राजीव कुमार ने सरकार के बचाव में कहा कि बिजनेस स्टैंडर्ड में लीक हुई रिपोर्ट एक मसौदा है और सरकार ने इसे स्वीकृत नहीं किया है.

देश में रोज़गार की हालत पर सनसनीखेज रिपोर्ट आने के बाद मोदी सरकार ने अपने बचाव में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार को उतार दिया. लेकिन, बिना तैयारी सरकार के बचाव में उतरे राजीव कुमार पत्रकारों के साधारण सवालों का जवाब नहीं दे सके और भरे प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी जगहंसाई हो गई.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने राजीव कुमार से रोज़गार से जुड़ा साधारण सा सवाल किया जिसका जवाब उन्होंने दिया “मुझे नहीं मालूम.” पढ़िए किन सवालों में अटक गए प्रधानमंत्री मोदी के दूत:

रिपोर्टर: क्या सरकार 2017-18 में बेरोज़गारी के आंकड़े को जानती है?

राजीव कुमार: हम आपको यह बात कैसे बता सकते हैं?

(सभी हंसते हैं)

राजीव कुमार ने सरकार के बचाव में कहा कि बिजनेस स्टैंडर्ड  में लीक हुई रिपोर्ट एक मसौदा है और सरकार ने इसे स्वीकृत नहीं किया है. हालांकि राजीव कुमार भूल गए कि राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग एक स्वायत्त संस्था है और इसकी विश्वसनीयता इसीलिए कायम है क्योंकि सरकार का इस रिपोर्ट से कुछ लेना देना नहीं होता है.

रिपोर्टर: सर, राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग ने कहा है कि हमने इसे स्वीकृत कर दिया है. इसके अलावे भी कौन इसे मंजूरी देने वाला है?

राजीव कुमार: मुझे लगता है कि कैबिनेट इसे अपने स्वीकृति देगी…मुझे नहीं मालूम.

रिपोर्टर: सर, लेकिन राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग जो रिपोर्ट पेश करता है, उसमें तो किसी की भी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती है ना?

राजीव कुमार: ईमानदारी से कहूं तो मुझे यह नहीं मालूम

बता दें कि मोदी सरकार बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़े को सार्वजनिक नहीं कर रही है, जिसके कारण राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. हालांकि बिजनस स्टैंडर्ड  के पत्रकार सोमेश झा ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के आंकड़ों का खुलासा कर दिया. इसके मुताबिक 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 6.1 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले 45 सालों में सबसे अधिक है.

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