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मोदी सरकार ने किया एनएमएमएल में फेर-बदल, अर्नब गोस्वामी को दी गई प्रताप भानु मेहता की जगह

एनएमएमएल में मोदी सरकार ने चार बदलाव किए.

संस्कृति मंत्रालय ने नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) की सदस्यता में कुछ बदलाव किये हैं. उन्होंने सोसाइटी से उन सदस्यों को निकल दिया जो कि सरकार के उस सोसाइटी को संचालित करने के तरीक़ों से नाख़ुश थे.

सोसाइटी से हटाए जाने वालों में प्रोफेसर उदयन मिश्र, डॉ बी पी सिंह और अर्थशास्त्री नितिन देसाई शामिल हैं. इनकी जगह भाजपा संसद विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर और राम बहादुर राय को यह ज़िम्मेदारी दी गई है. एक चौथा बदलाव भी किया गया. शिक्षाविद प्रताप भानु मेहता के इस्तीफा देने के बाद उनकी जगह न्यूज़ एंकर अर्नब गोस्वामी को दी गई है.

संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार इन नए नियुक्तियों का कार्यकाल 26 अप्रैल, 2020 तक या अगले निर्देश तक होगा. देसाई, सिंह और सरकार के बीच मतभेद एनएमएमएल के ही परिसर तीन मूर्ति भवन में प्रधानमंत्रियों के लिए एक संग्रहालय बनाने को लेकर बढ़ा. सिंह ने पहले कहा था, “अगर प्रधानमंत्री का एक संग्रहालय बनता है तो हर राज्य में मुख्मंत्री के संग्रहालय की भी मांग होगी क्योंकि वे राज्यों के प्रमुख हैं.”

इससे पहले 15 अक्टूबर को संस्कृति मंत्री महेश शर्मा एवं आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पूरी द्वारा संग्रहालय की नींव रखी गई. इन नई नियुक्तियों पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं एनएमएमएल के सदस्य जयराम रमेश ने कहा, “जिन लोगों को हटाया गया है वे लोग विद्वान एवं सत्यनिष्ठ लोग थे.”

ज्ञात हो कि एनएमएमएल एक स्वायत्त संस्था है जो कि 1964 में स्थापित हुई थी और यह संस्कृति मंत्रालय की देख-रेख में है. एनएमएमएल सोसाइटी की स्थापना 1966 में हुई थी और यह मेमोरियल के प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए ज़िम्मेदार है.

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