कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

‘योगीराज’ में पानी की किल्लत से जूझ रहा ये गांव, गणतंत्र दिवस पर 50 युवक खुद को करेंगे नीलाम

उत्तर प्रदेश के हाथरस का नगला माया गांव के लोग पानी की किल्लत से परेशान है.

केंद्र की मोदी सरकार भले ही देश के कोने-कोने में बिजली-पानी की सुविधाएं देने का दम भरती हो, लेकिन एक गांव ऐसा भी हैं जो आजादी के 72 साल के बाद भी पानी की किल्लत से जूझ रहा है. अब इस गांव के युवक पानी की कमी को दूर करने के लिए इस गणतंत्र दिवस खुद को नीलाम करने की तैयारी कर रहे हैं.

‘नवभारत टाइम्स’ के मुताबिक उत्तर प्रदेश के हाथरस का नगला माया गांव के लोग पानी की किल्लत से परेशान है. तमाम कोशिश करने के बावजूद भी भी अधिकारियों ने गांववालों की बात नहीं सुनी तो गांव के युवकों ने खुद को नीलाम करने का फैसला लिया है।

गांव के 50 युवक 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर खुद को नीलाम करने जा रहे हैं. जो भी फंड इकट्ठा होगा, उससे गांव में पीने के पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। युवकों ने बताया कि नीलामी वाले दिन वे लोग भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे।

बता दें कि हाथरस जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां पीने का पानी नहीं है। कई घर ऐसे हैं, जिनके यहां पाना की कनेक्शन तक नहीं है.

लोगों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पीने के पानी की सुविधा ने होने की वजह से तीन लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं.

वहीं अधिकारियों से मिलकर गांववालों ने कई बार अपनी शिकायत और परेशानी बताई लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। गांव के लोगों ने पीने के पानी की किल्लत की शिकायत राष्ट्रपति तक से की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

इस मामले पर हाथरस के जिलाधाकरी रामशंकर मौर्या ने कहा कि गांवों में पीने के पानी की समस्या से वो वाकिफ हैं, जिसको लेकर प्रशासन ने सरकार को दो अलग-अलग प्रस्ताव बनाकर भेजे हैं लेकिन इन प्रस्तावों पर कोई भी रूचि लेने के लिए तैयार नहीं है. दो अलग-अलग प्रस्तावों में नगला माया और राजनगर समेत 61 गांवों में पीने के पानी का प्रबंध करने का प्रस्ताव था. हमारे स्तर से कुछ भी पेंडिंग नहीं है. बजट आते ही हम काम शुरू कर देंगे.

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