कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नोटबंदी से हुई 35 लाख लोगों की नौकरियां तबाह, औरतें एवं मज़दूर सबसे ज़्यादा प्रभावित – सीएमआईई प्रमुख

नोटबंदी के बाद के महीने में 1 करोड़ 27 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश व्यास ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित रोज़गार की चर्चा के दौरान बताया कि नवंबर 2016 में जब मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद कम-से-कम 35 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दीं।

गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार सीएमआईई द्वारा किए गए सर्वेक्षण में देशभर के 1.72 लाख परिवारों को शामिल किया गया था जिसमें नोटबंदी ने श्रम बल करने वालों और महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था। नोटबंदी ने स्पष्ट रूप से लगातार रोज़गार पर असर डाला है। नोटबंदी के बाद के महीने में 1 करोड़ 27 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी।

व्यास ने कहा कि शुरुआत में यह संख्या 1 करोड़ 27 लाख की थी फिर बाद में यह संख्या 35 लाख हो गई या शायद इस संख्या के कम होने के पीछे कोई और कारण था। नवंबर 2016 में नोटबंदी के पहले और उसके बाद चार महीने में सीएमआईई ने अपना यह संर्वेक्षण किया था।

 

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