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नागालैंड में एनआरसी के तर्ज पर बनेगा स्थानीय लोगों का नागरिक रजिस्टर

अधिसूचना के अनुसार इस प्रक्रिया की शुरुआत 10 जुलाई से हो जाएगी, जिसे मात्र 60 दिनों के अंदर ही पूरा कर लिया जाना है.

नागालैंड सरकार भी असम के तरह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(एनआरसी) के तर्ज पर राज्य के सभी स्थानीय नागरिकों के लिए रजिस्टर तैयार करेगी. राज्य सरकार ने इसके लिए सोमवार(1 जुलाई) को अधिसूचना जारी की है.

अधिसूचना के अनुसार इस प्रक्रिया की शुरुआत 10 जुलाई से हो जाएगी, जिसे मात्र 60 दिनों के अंदर ही पूरा कर लिया जाना है. इस स्थानीय लोगों की नागरिक पंजी(आरआईआईएन) का उद्देश्य स्थानीय निवासियों की सूची तैयार करने के साथ अयोग्य व्यक्तियों को स्वदेशी वाशिंदा प्रमाण(आईआईसी) देने से रोकना है. एक बार आरआईआईएन को अंतिम रूप देने के बाद नए प्रमाण पत्र नहीं जारी किए जाएंगे. नए स्थानीय प्रमाण पत्र जन्म लिए उन्हीं बच्चों के बन पाएंगे जिनके माता-पिता इस रजिस्टर में पंजिकृत होंगे.

नागालैंड सरकार के अनुसार इस सूची को तैयार करने के लिए अधिकारिक टीमें गांव और वार्ड स्तर पर हरेक घर जाकर काम करेंगी. इसे तैयार करने के बाद 11 सितम्बर को इसे गांव और वार्ड के साथ-साथ ज़िला और राज्य सरकार की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी. सूची संबंधी शिकायतों को दूर करने के लिए 10 अक्टूबर तक का समय दिया जाएगा.

इसके बाद सूची को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. हर स्थानीय व्यक्ति को एक विशेष आईडी कार्ड दी जाएगी.

अधिसूचना के अनुसार एक बार रजिस्टर को अंतिम रूप देने के बाद नए प्रमाण पत्र जारी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. यदि किसी का नाम इस सूची में नहीं आ पाया है तो वह गृह आयुक्त के पास आवेदन करेगा. प्राप्त आवेदन की सत्यता के आधार पर सूची को अपडेट किया जा सकता है.

असम में एनआरसी लागू करने की प्रक्रिया मुद्दों से व्याप्त रहा है. कारगिल युद्ध की लड़ाई लड़ चुके सेना के रिटार्यड सूबेदार मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी करार दिया गया था. एक प्रशासनिक चूक के वजह से उन्हें हिरासत शिविर में भेज दिया गया. बाद में मामला मीडिया में सुर्खियां बटोरा और सनाउल्लाह को रिहा किया गया. लेकिन कई अन्य लोग जो प्रशासनिक चूक के वजह से एनआरसी से बाहर हो चुके हों, यह ज़रूरी नहीं कि वह भी इतना भाग्यशाली हो कि उनकी बात मीडिया में आ सके.

स्क्रॉल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, विदेशी ट्रिब्यूनल के प्रदर्शन का मूल्यांकन ‘विदेशी’ घोषित किए गए लोगों की संख्या के आधार पर किया जा रहा है, जो ऐसी प्रक्रिया को बल दे रहा है. रिपोर्ट में ट्रिब्यूनल के एक पूर्व सदस्य ने यह भी बताया है कि निमिष चश्मे के माध्यम से देखें तो हर व्यक्ति को तकनीकी आधार पर विदेशी करार दिया जा सकता है.

लोगों के नाम एनआरसी के मसौदे में शामिल नहीं होने पर आत्महत्या की भी ख़बरें सामने आई है. इस साल की शुरुआत में, पूर्व सिविल सेवकों ने एक खुले पत्र में लिखा था कि एनआरसी प्रक्रियाओं में अंतर्निहित भेदभाव है जो भाषाई, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को असम्मानजनक रूप से बाहर करता है. पत्र में कहा गया है, “एनआरसी के मसौदे से बहुत अधिक नामों का बाहर किया जाना एनआरसी राज्य समन्वयक की प्रक्रियात्मक और उसकी क्षमता की कमजोरियों के मिश्रण का परिणाम है और इसके बारे में बहुत कुछ बताया गया है. कमियों में अन्य लोगों के साथ खराब प्रबंधन, तकनीकी गड़बड़ियां और मनमाने शारीरिक सत्यापन शामिल हैं.

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