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मोदी है तो मुमकिन है: 24 साल में पहली बार, पुरुष कामगारों की संख्या में आई गिरावट

NSSO की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में पुरुष कामगारों की संख्या 28.6 करोड़ रह गई है.

भारत में 24 सालों में पहली बार पुरुष कामगारों की संख्या में  गिरावट दर्ज की गई है. नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2017-18 में पुरुष कामगारों की संख्या घटकर 28.6 करोड़ रह गई  है.

इंडियन एक्सप्रेस ने NSSO आंकड़ों आधार पर यह रिपोर्ट पेश की है. इसके मुताबिक 1993-94 में देश में पुरुष श्रमिकों की संख्या 21.9 करोड़ थी. जो साल 2011-12  में बढ़कर 30.4 करोड़ हो गई थी.

हालांकि 2017-18 का सर्वे बताता है कि पिछले पांच सालों रोज़गार के अवसर घटे हैं. जिसकी वजह से पुरुष कामगारों की संख्या घट कर 28.6 करोड़ हो गई है.

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से रोक दिया है. सरकार के इस फैसले से नेशनल स्टेटिकल कमीशन के कार्यवाहक चेयरपर्सन पीसी मोहनन और एक सदस्य जेवी मीनाक्षी ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है.

एनएसएसओ की रिपोर्ट के अनुसार साल 2011-12 से लेकर साल 2017-18 के बीच भारत के ग्रामीण इलाकों में 4.3 करोड़ नौकरियां कम हुईं है. वहीं इस दौरान शहरों में 40 लाख नौकरियां कम हो गई. शहरों में पुरुष कामगारों के रोजगार में 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार  साल 2011-12 से 2017-18 तक देश में कुल 4.7 करोड़ रोजगार में कमी आई है. यह आंकड़ा सऊदी अरब की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है.

इस रिपोर्ट में शहरों और ग्रामीण इलाकों का अलग-अलग डेटा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत रही है जबकि ग्रामीण इलाकों में 5.8 प्रतिशत बेरोजगारी हुई है.

नाम न बताने की शर्त पर एक विशेषज्ञ ने बताया कि अभी इस डाटा का और अध्ययन किया जाना है, लेकिन यह बात साफ है कि नौकरियों में कमी आई है और रोजगार के नए मौके भी पैदा नहीं हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि सत्ता में आने से पहले मोदी सरकार ने हर साल युवाओं को करोड़ो रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन 5 साल बाद भी मोदी सरकार अपना यह वादा पूरा करने में नाकाम साबित हुई है.

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