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मोदी राज में बेरोजगारी ने छू लिया आसमान, 45 सालों में सबसे अधिक उछाल पर बेरोज़गारी दर

2011-12 में बेरोज़गारी की दर 2.2 प्रतिशत थी जो 2017-18 में बढ़कर 6.1 प्रतिशत पर आ गई है.

देश में मौजूदा बेरोज़गारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक सर्वे के मुताबिक 2017-18 में बेरोजगारी का आंकड़ा 6.1 प्रतिशत पर रहा है. हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि सरकार बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़े जारी करने से रोक रही है.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक साल 2017-18 में बेरोज़गारी की दर 1972-73 के बाद सबसे ज्यादा है. हालांकि यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के सर्वे के मुताबिक 2011-12 में बेरोज़गारी की दर 2.2 प्रतिशत थी. इस रिपोर्ट का खासा महत्व है क्योंकि यह सर्वेक्षण एक सरकारी एजेंसी द्वारा कराया गया है और नोटबंदी के बाद मोदी सरकार में नौकरियों को लेकर यह पहला सर्वे है.

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय का रिपोर्ट कहता है कि शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा है. शहरी क्षेत्र में बेरोज़गारी की दर 7.8 प्रतिशत है, वही ग्रामीण क्षेत्र में यह रेट 5.3 प्रतिशत है. इसके साथ ही कार्यबल से भी भारी संख्या में लोगों को बाहर किया गया है. श्रम बल भागीदारी दर के आंकड़े भी पिछले सालों में सबसे अधिक पाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 1977-78 में बेरोज़गारी की दर 2.5 प्रतिशत थी.

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण युवाओं (पुरुषों) के बेरोज़गारी का आंकड़ा 2004-05 में 3.9 था, यह आंकड़ा 2009-10 में 4.7 पर पहुंचा. 2011-12 में यह आंकड़ा 5.0 पर था. वही 2017-18 में भारी वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत पर पहुंच गया. वही ग्रामीण महिलाओं के बेरोज़गारी का आंकड़ा 2004-05 में 4.2 प्रतिशत था, यह आंकड़ा 2009-10 में 4.6 पर पहुंचा. 2011-12 में यह आंकड़ा 4.8 पर था. वही 2017-18 में भारी वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 13.6 प्रतिशत पर पहुंच गया.

शहरी पुरूषों के बेरोज़गारी का आंकड़ा देखें तो 2004-05 में 8.8 प्रतिशत था. 2009-10 में यह आंकड़ा 7.5 प्रतिशत रहा. 2011-12 में बेरोज़गारी का प्रतिशत 8.1 रहा तो 2017-18 में 18.7 पर आ गया है. शहरी महिलाओं की बेरोज़गारी का आंकड़ा 2004-05 में 14.9 प्रतिशत था, यह आंकड़ा 2009-10 में 14.3 पर पहुंचा. 2011-12 में यह आंकड़ा 13.1 प्रतिशत था. वही 2017-18 में भारी वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 27.2 प्रतिशत पर पहुंच गया.

इसके साथ ही शिक्षित लोगों में बेरोज़गारी के आंकड़े ने भी आसमान छू लिया है. शिक्षित ग्रामीण महिलाओं में बेरोज़गारी का आंकड़ा 2004-05 में 9.7 प्रतिशत था, जो 2011-12 में बढ़कर 17.3 प्रतिशत हो गया.

बता दें कि रोज़गार के मुद्दे पर मोदी सरकार लगातार घिर रही है. हाल ही में आई सीएमआईई की रिपोर्ट में कहा गया था कि नोटबंदी की वजह से सिर्फ 2017-18 में करीब 1 करोड़ 11 लाख लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी. भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान हर साल 2 करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था.

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