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‘न्याय’ योजना ग़रीबों को आर्थिक स्वतंत्रता व सम्मान प्रदान करेगी: डॉ मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने कहा, "न्याय हमारे आर्थिक इंजन को पुन: प्रारंभ करने में मदद करेगा, जो आज ठहराव की स्थिति में आ गया है. जरूरतमंद लोगों के हाथ में पैसा पहुंचने से अर्थव्यवस्था में मांग उत्पत्र होगी और आर्थिक गतिविधि बढ़कर नौकरियों का निर्माण होगा."

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस के न्याय योजना को दोहरे उद्देश्य वाली शक्तिशाली योजना बताते हुए कांग्रेस को वोट देने की अपील की है. इसके साथ ही न्याय योजना के फायदों का व्याख्यान किया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, “25 मार्च 2019 को कांग्रेस अध्यक्ष, श्री राहुल गांधी ने न्याय- ‘न्यूनतम आय योजना’ प्रस्तुत की. यह योजना दोहरे उद्देश्य वाली एक शक्तिशाली योजना है, जो एक तरफ हमारे देश की बची खुची ग़रीबी हटाएगी. वहीं, रूकी हुई अर्थव्यवस्था को पुन: गति देगी.”

उन्होंने कहा, “न्याय के तहत भारत के 20 प्रतिशत सर्वाधिक ग़रीब परिवारों में से प्रत्येक परिवार को 72,000 रूपये प्रतिवर्ष की सहयोग राशि दी जाएगी. मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि न्याय योजना को देश के नागरिकों ने बहुत पसंद किया और इस योजना पर पूरे देश में विस्तृत चर्चा हो रही है.”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “जब 1947 में भारत ब्रिटिश राज से आजादी मिली, उस समय लगभग 70 प्रतिशत गरीबी सीमा के नीचे थे. आजादी के बाद पिछले सात दशकों में बनी विभिन्न केंद्र सरकारों द्वारा अपनाई गयी मजबूत नीतियों के चलते ग़रीब का स्तर 70 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत पर आ गया. अब समय है, जब बची हुआ ग़रीबी को दूर करने के लिए अपना संकल्प पुन: दोहराएं.”

उन्होंने बताया, “न्याय योजना हर भारतीय परिवार के लिए उसकी गरीमा व सम्मान सुनिश्चित करेगी. सीधे आय का सहयोग प्रदान कर, न्याय ग़रीबों को आर्थिक स्वतंत्रता व सम्मान प्रदान करेगी. न्याय योजना के साथ न्यूनतन आय गारंटी के युग में प्रवेश करेगा और नए कल्याणकारी राज्य के लिए नए सामाजिक अनुबंध का निर्माण करने में मदद करेगा.”

मनमोहन सिंह ने कहा, “न्याय हमारे आर्थिक इंजन को पुन: प्रारंभ करने में मदद करेगा, जो आज ठहराव की स्थिति में आ गया है. जरूरतमंद लोगों के हाथ में पैसा पहुंचने से अर्थव्यवस्था में मांग उत्पत्र होगी और आर्थिक गतिविधि बढ़कर नौकरियों का निर्माण होगा.”

उन्होंने बताया, “इस प्रभाव को अर्थशास्त्रियों द्वारा कीनेशियन प्रभाव कहा जाता हैं. जब निजी निवेश और औद्योगिक उत्पादन कम है, उस समय न्याय योजना अर्थव्यवस्था को पुन: जीवित करेगी और नई फैक्ट्रियों एवं नौकरियों का निर्माण करेगी.”

पूर्व प्रधानमंत्री के अनुसार, “कांग्रेस वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए समर्पित है. न्याय योजना पर भारत की जीडीपी का ज्यादा से ज्यादा 1.2 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत खर्च होगा, लगभग 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की हमारी अर्थव्यवस्था यह खर्च वहन करने में समर्थ है. न्याय के कार्ण मध्यम वर्ग पर किसी भी प्रकार को कोई टैक्स बोझ डालने की जरूरत नहीं होगी.”

मनमोहन सिंह ने कहा,  न्याय योजना द्वारा अर्थव्यवस्था को मिली गति से यह वित्तीय अनुशासन बनाने में बल्कि ज्यादा मदद मिलेगी. न्याय योजना काफी विचार-मनन और विशेषज्ञों द्वारा परामर्श लिए जाने के बाद बनाई गई है.

उन्होंने कहा, “जिस प्रकार हमने 1991 में डि-लाईसेंसिंग नियम, फिर मनरेगा के तहत सभी को काम के अधिकार के साथ भारत के विकास के लिए नए कीर्तिमान बनाए थे, उसी प्रकार मुझे विश्वास है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार न्याय योजना का क्रियान्वयन भी सफलतापूर्वक करेगी और सामाजिक न्याय एवं बुद्धिमतापूर्ण अर्थव्यवस्था के नाम मॉडल की शुरूआत करेगी.”

उन्होंने भरोसा दिखाते हुए कहा,  “मेरा विश्वास है कि न्याय में भारत को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाते हुए दुनिया में ‘ग़रीब-मुक्त’ देशों की सूची में लाने की सामर्थ्य हैं. मुझे उम्मीद है कि मेरे सामने ही हमारा देश यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर लेगा.”

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